PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर वापी की 15 वर्षीय दिव्या तिवारी ने भोजपुरी गीत लिखकर दी अनोखी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वापी की 15 वर्षीया छात्रा दिव्या तिवारी ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर एक अनोखे अंदाज़ में बधाई दी — उन्होंने भोजपुरी भाषा में एक विशेष गीत लिखकर अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त कीं। कक्षा 9 में पढ़ने वाली इस किशोरी की यह पहल वापी में चर्चा का विषय बन गई है।
अनोखी पहल की पृष्ठभूमि
दिव्या तिवारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और विकास कार्यों से प्रभावित हैं। उन्होंने यह गीत प्रधानमंत्री को एक खास तोहफे के रूप में तैयार किया, जिसमें उनके प्रति अपनी भावनाएँ शब्दों में उतारी हैं। गौरतलब है कि भोजपुरी और हिंदी — दोनों भाषाओं में रचित यह गीत, महज 15 वर्ष की आयु में रचनात्मक प्रतिभा का उदाहरण है।
परिवार और स्थानीय स्तर पर उत्साह
दिव्या के इस प्रयास को लेकर उनके परिवार में उत्साह का माहौल है। वापी के स्थानीय लोगों के बीच भी इस नन्हीं गीतकार की इस पहल की सराहना हो रही है। आम तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शुभकामनाएँ देने के कई तरीके अपनाए जाते हैं, लेकिन दिव्या ने अपनी प्रतिभा के ज़रिए यह बधाई देने का एक विशिष्ट मार्ग चुना।
वैष्णो देवी में श्रद्धालुओं की प्रार्थना
प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी भवन में आए श्रद्धालुओं ने भी उन्हें बधाई दी और उनके दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की। कई तीर्थयात्रियों ने बताया कि वे विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी के लिए आशीर्वाद माँगने मंदिर पहुँचे थे।
गोरखपुर से आए एक श्रद्धालु ने कहा, 'मैंने तय किया था कि आज के दिन माता वैष्णो देवी का दर्शन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी उम्र की कामना करूंगा। पूरे परिवार के साथ दर्शन करने जा रहा हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति कर रहा है।
गोरखपुर से ही आईं आभा सिंह ने कहा, 'हमने तय किया था कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर माँ के दर्शन करने जाएंगे और प्रार्थना करेंगे कि वे खुशहाल रहें और उनकी लंबी उम्र हो, जिससे कि वे देश को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करें।'
देशभर से बधाइयों का सिलसिला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर 2026 को देशभर से शुभकामनाओं और बधाइयों का ताँता लगा रहा। वापी की दिव्या की पहल इस कड़ी में एक भावनात्मक और रचनात्मक योगदान के रूप में सामने आई। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिव्या की यह रचना प्रधानमंत्री तक पहुँच पाती है।