अमिताभ बच्चन का 83वाँ जन्मदिन: दोस्ती में उतरे राजनीति में, बोफोर्स की आँधी में दिया इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के 'एंग्री यंग मैन' और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर 2026 को अपना 83वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे अमिताभ, प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन के पुत्र हैं। रुपहले पर्दे पर दशकों तक राज करने वाले 'बिग बी' ने एक दौर में सिनेमा छोड़ राजनीति का रुख किया था — मगर वह अध्याय उनकी फिल्मी पारी जितना सफल नहीं रहा।
दोस्ती की खातिर राजनीति में प्रवेश
1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन के घनिष्ठ मित्र राजीव गांधी को भावुक समर्थन देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की सदस्यता ग्रहण की। राजीव गांधी के आग्रह पर उन्होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृहनगर इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। इस चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश के दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को ऐतिहासिक मतों के अंतर से एकतरफा मात दी — जो चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जाती है।
बोफोर्स घोटाले की आँधी और इस्तीफा
जब अमिताभ बच्चन का राजनीतिक करियर शिखर पर था, तभी 1987 में देश के चर्चित बोफोर्स घोटाले में उनका और उनके भाई अजिताभ बच्चन का नाम उछाला गया। हालाँकि उन पर लगे सभी आरोप कथित तौर पर निराधार साबित हुए, फिर भी मीडिया ट्रायल और विपक्षी दलों के लगातार विरोध से व्यथित होकर उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किए बिना जुलाई 1987 में लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि 2012 में उन्हें इस मामले में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई थी।
यह ऐसे समय में आया जब भारतीय राजनीति में सेलिब्रिटी उम्मीदवारों की साख को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई थी। बोफोर्स प्रकरण ने अमिताभ के लिए राजनीति को स्थायी रूप से अनाकर्षक बना दिया।
राजनीति से विदाई और परिवार की सियासी राह
इस्तीफे के बाद अमिताभ बच्चन ने सक्रिय राजनीति से हमेशा के लिए तौबा कर ली और दोबारा कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। उस दौर में उनकी कंपनी एबीसीएल (ABCL) गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थी। गांधी परिवार से कोई सहायता न मिलने पर दिवंगत नेता अमर सिंह ने उनकी आर्थिक मदद की, जिसके चलते एक समय अमिताभ का अप्रत्यक्ष झुकाव समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर देखा गया।
वहीं उनकी पत्नी जया बच्चन ने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। जया बच्चन 2004 से लगातार समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में सक्रिय हैं।
खुद अमिताभ के शब्दों में वह फैसला
एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने अपने राजनीतिक निर्णय के बारे में खुलकर कहा था: 'मेरा वह फैसला भावनात्मक था। मैं एक दोस्त की मदद करना चाहता था इसलिए राजनीति में आया। राजनीति में आने के बाद पता चला यहाँ भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। मुझे लगा कि मैं यह नहीं कर सकता और इसलिए राजनीति छोड़ दी।'
सिनेमा से राजनीति और वापसी — एक ऐतिहासिक संदर्भ
अमिताभ बच्चन भारतीय मनोरंजन जगत के उन विरले कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने ऊँचाइयों से राजनीतिक रण में छलाँग लगाई, फिर पूरी तरह परदे पर वापसी की। उनकी यह यात्रा भारतीय सार्वजनिक जीवन में सेलिब्रिटी राजनीति की सीमाओं और चुनौतियों का एक जीवंत दस्तावेज़ है। 83वें जन्मदिन पर 'बिग बी' न केवल सिनेमा की विरासत बल्कि एक असाधारण जीवन-यात्रा के प्रतीक के रूप में पूजनीय हैं।