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गोपीनाथ: भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर का 96 वर्ष की आयु में निधन

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गोपीनाथ: भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर का 96 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी गोपीनाथ का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह उस ऐतिहासिक टीम के अंतिम सदस्य थे जिसने भारत की पहली टेस्ट जीत का श्रेय पाया।

मुख्य बातें

गोपीनाथ का निधन भारतीय क्रिकेट के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने 96 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहा।
गोपीनाथ 1951-52 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था।
वे भारत की पहली टेस्ट जीत के अंतिम जीवित सदस्य थे।
गोपीनाथ ने 8 टेस्ट मैचों में 242 रन बनाए।

चेन्नई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित और उम्रदराज चेहरों में से एक चिंगलपुत दोराइकन्नु गोपीनाथ ने 96 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा। रिपोर्टों के अनुसार, गोपीनाथ का निधन चेन्नई के अड्यार में अपनी बेटी के घर पर हुआ। 2024 में दत्ता गायकवाड़ के निधन के बाद, गोपीनाथ उस भारतीय टीम के अंतिम जीवित सदस्य थे जिसने देश की पहली टेस्ट जीत का इतिहास रचा था।

तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने इस महान खिलाड़ी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा, "रेस्ट इन पीस, सीडी गोपीनाथ! भारतीय क्रिकेट के सच्चे अग्रदूत और उस ऐतिहासिक टीम के आखिरी जीवित सदस्य, जिसने भारत की पहली टेस्ट जीत की कहानी लिखी थी। आपकी विरासत इस खेल के समृद्ध इतिहास में हमेशा के लिए अमर रहेगी।"

1 मार्च 1930 को चेन्नई (जिसे पहले मद्रास के नाम से जाना जाता था) में जन्मे गोपीनाथ क्रिकेट के एक ऐतिहासिक दौर के प्रतीक रहे हैं। इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने मद्रास के लिए घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के जरिए अपनी पहचान बनाई, जिससे अंततः राष्ट्रीय टीम में उनका चयन संभव हुआ।

सीडी गोपीनाथ ने 1951-52 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की। अपने पहले मैच में ही गोपीनाथ ने नाबाद अर्धशतक बनाया, और उसी श्रृंखला में ब्रेबोर्न स्टेडियम में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1960 में ईडन गार्डन्स पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।

गोपीनाथ ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जहां उन्होंने 35 रनों का योगदान दिया और वीनू मांकड़ की गेंद पर ब्रायन स्टैथम का महत्वपूर्ण कैच भी लपका। वीनू मांकड़ ने उस मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में 8 विकेट और दूसरी में 4 विकेट लिए।

गोपीनाथ ने अपने टेस्ट करियर में 8 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 22 की औसत से 242 रन बनाए। इसमें एक अर्धशतकीय पारी भी शामिल थी। साथ ही, उन्होंने 1 विकेट भी अपने नाम किया। वहीं, 83 फर्स्ट क्लास मैचों में इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 9 शतकों के साथ 4,259 रन बनाए और 14 विकेट भी हासिल किए।

गोपीनाथ ने 1950 के दशक के मध्य से लेकर 1960 के दशक की शुरुआत तक मद्रास की कप्तानी की। 1970 के दशक में वे राष्ट्रीय चयनकर्ता बने और बाद में चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे। 1979 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वे भारतीय टीम के मैनेजर के रूप में भी कार्यरत रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय क्रिकेट की नींव को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपीनाथ का जन्म कब हुआ?
गोपीनाथ का जन्म 1 मार्च 1930 को चेन्नई में हुआ था।
गोपीनाथ ने कब टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया?
गोपीनाथ ने 1951-52 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था।
गोपीनाथ की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी?
गोपीनाथ ने भारत की पहली टेस्ट जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
गोपीनाथ का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच कब था?
गोपीनाथ का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच 1960 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ईडन गार्डन्स पर था।
गोपीनाथ ने कितने टेस्ट मैच खेले?
गोपीनाथ ने अपने करियर में कुल 8 टेस्ट मैच खेले।
राष्ट्र प्रेस
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