क्या ईरान में खामेनेई के खिलाफ विरोध गल्फ देशों तक पहुंच गया है?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में प्रदर्शनकारी खामेनेई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
- महंगाई और बेरोजगारी के चलते लोगों में आक्रोश है।
- ट्रंप की धमकियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गई हैं।
- गल्फ देशों ने स्थिति पर ध्यान देने के लिए बैठकें बुलाई हैं।
- संभावित युद्ध की स्थिति को लेकर अटकलें तेज हैं।
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में वर्तमान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। सुप्रीम नेता अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ लोगों का गुस्सा उभर रहा है। महंगाई और बेरोजगारी के चलते जनसमूह ने सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरानी सरकार को एक्शन लेने की बार-बार धमकी दे रहे हैं। ट्रंप ने खामेनेई को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की, तो अमेरिका खामोश नहीं रहेगा। इस बीच, ट्रंप की ये धमकियाँ गल्फ देशों में भी गूंज रही हैं। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने स्थिति पर ध्यान रखा है।
वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा किए गए कार्यवाही के बाद, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि ईरान में अमेरिका और इजरायल मिलकर हमला कर सकते हैं। ट्रंप की धमकियों ने इस संभावना को और बढ़ावा दिया है।
इन घटनाक्रमों के बीच, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने मंत्री स्तर की बैठकें आयोजित की हैं। इसके साथ ही, सऊदी अरब ने ईरानी सरकार के साथ संवाद कर अपना समर्थन व्यक्त किया है। ज्ञात हो कि गल्फ देशों में सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और ओमान शामिल हैं।
ईरान में उत्पन्न तनाव के मद्देनजर, गल्फ देशों ने मंत्री स्तर की बैठक बुलाकर चिंता व्यक्त की है, हालांकि यह बैठक सार्वजनिक नहीं हुई। फिर भी, संयुक्त बयान जारी किए गए हैं। गल्फ देशों ने कूटनीति के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने की अपील की है। सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, यूएई, और बहरीन ने ईरान की स्थिति पर विचार करने के लिए सामूहिक बयान जारी किए हैं।
यूएई और सऊदी अरब के अधिकारियों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से संवाद किया है ताकि ईरान में बढ़ते तनाव को कम किया जा सके।
गल्फ देशों ने सीधे युद्ध की संभावना पर चर्चा नहीं की है, लेकिन सामान्यतः संयम और कूटनीतिक समाधान की मांग की है। पहले भी, गल्फ देशों ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी है। ओमान ने संयुक्त बयान और वार्ता के प्रयासों का समर्थन किया है।
ट्रंप की धमकियों के बाद, किसी भी गल्फ देश ने स्पष्ट रूप से समर्थन या चुनौती नहीं दी है, लेकिन हलचल बनी हुई है। सभी गल्फ देशों की नज़र ट्रंप के अगले कदम पर है।