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अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को आईना दिखाया: जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से अधिक

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अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को आईना दिखाया: जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से अधिक

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग में रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान के आईएमएफ बेलआउट से कहीं अधिक है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी विकास यात्रा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को मानवाधिकार आयोग में लताड़ लगाई।
जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ के बेलआउट से अधिक है।
पाकिस्तान को अपने आंतरिक संकट पर ध्यान देना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में विकास की प्रक्रिया जारी है।

संयुक्त राष्ट्र, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में तीखी आलोचना की। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि पाकिस्तान एक फंतासी में जी रहा है। हमारे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए जो बजट आवंटित किया गया है, वह पाकिस्तान द्वारा आईएमएफ से लिए गए बेलआउट से भी अधिक है।

यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। अक्सर, पाकिस्तान एक ही विषय पर भारत को निशाना बनाने का प्रयास करता है।

हाल के मामले में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया, तो यूएन के मंच पर भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की। अनुपमा सिंह ने कहा, "भारत, पाकिस्तान और ओआईसी की उच्च स्तरीय बैठक में भारत के बारे में किए गए बयानों का जवाब देने के लिए हमें मजबूर होना पड़ा। हम इन आरोपों को पूरी तरह से ख़ारिज करते हैं। ओआईसी, पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को दोहराकर, केवल यह दिखाता है कि वह कितनी गहराई से एक सदस्य के नियंत्रण में आ गया है। पाकिस्तान के लगातार प्रोपेगेंडा से अब जलन की बू आ रही है।"

अनुपमा सिंह ने स्पष्ट किया, "शायद पाकिस्तान को यह यकीन नहीं हो रहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी अधिक है। अंततः, पाकिस्तान की लगातार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के जरिए क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से प्रगति कर रहा है। पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने बढ़ते आंतरिक संकट पर ध्यान दे।"

अनुपमा सिंह ने आगे कहा, "हम ऐसे प्रोपेगेंडा को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हम इसे तथ्यों के साथ समाप्त करने के लिए कुछ बातें जरूर कहेंगे। जम्मू और कश्मीर भारत का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा है और रहेगा। पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बातें इस तथ्य को नहीं बदल सकतीं कि जम्मू-कश्मीर का भारत में शामिल होना पूरी तरह से वैध और पक्का है।"

पीओके के संदर्भ में अनुपमा सिंह ने कहा, "इस क्षेत्र का एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारत के क्षेत्रों पर गैर-कानूनी कब्जा है। हम पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वह इन क्षेत्रों को खाली करे।"

उन्होंने यह भी कहा, "जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान इस बात का सबूत हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोग पाकिस्तान के फैलाए आतंकवाद और हिंसा की सोच को नकार रहे हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊँचे पुल चिनाब रेल ब्रिज की शुरुआत हुई है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान भ्रम में है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर में विकास की प्रक्रिया कैसे जारी है। यह बात महत्वपूर्ण है कि भारत अपने आंतरिक मामलों को मजबूती से प्रस्तुत करे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को स्पष्ट करे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर लगातार प्रोपेगेंडा कर रहा है और इसके विकास बजट को कम करके आंकने की कोशिश कर रहा है।
क्या जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से अधिक है?
जी हाँ, अनुपमा सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान के आईएमएफ से मिले कर्ज से दोगुना है।
पाकिस्तान के लिए भारत का संदेश क्या था?
अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपने आंतरिक संकट पर ध्यान केंद्रित करे, बजाय इसके कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखावा करे।
राष्ट्र प्रेस
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