जनधन-DBT से भ्रष्टाचार पर लगाम: BJP सांसद संदीप पाठक ने गिनाई मोदी के 25 वर्षों की उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संदीप पाठक ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह महज एक आयोजन नहीं, बल्कि एक समर्पित जीवन-यात्रा का पड़ाव है। उनके अनुसार, नरेंद्र मोदी ने पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में देश की निरंतर सेवा की है। पाठक ने इस अवसर को 'राष्ट्र-सेवा के ढाई दशक' के रूप में रेखांकित किया।
जनधन और DBT: भ्रष्टाचार-रोधी कदम
पाठक ने कहा कि एक समय देश में बड़ी संख्या में नागरिकों के पास बैंक खाते ही नहीं थे। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के खाते खोले गए और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के ज़रिये सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँचने लगे। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर भ्रष्टाचार पर उल्लेखनीय लगाम लगाई और डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन दिया।
पाठक ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटाइजेशन, किसानों को सशक्त बनाने, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में कई महत्त्वपूर्ण पहल कीं। उनके अनुसार, ये 'छोटे लेकिन बुनियादी और रचनात्मक कदम' देश को 'विकसित भारत' की दिशा में ले जाने में सहायक रहे हैं। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को भी रेखांकित किया।
SIR विवाद पर विपक्ष पर निशाना
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विरोध पर पाठक ने विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को 'साफ-सुथरा' बनाने की प्रक्रिया में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसमें मृत व्यक्तियों, स्थान बदल चुके लोगों, बदले हुए पतों और डुप्लीकेट नामों को हटाने का काम होता है। पाठक के अनुसार, यह प्रक्रिया नई नहीं है और पहले भी इस तरह का पुनरीक्षण होता रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस राज्य में विपक्ष जीतता है, वहाँ मतदाता सूची को सही माना जाता है, और जहाँ हार होती है वहाँ उसी सूची पर सवाल उठाए जाते हैं। पंजाब के पटियाला के स्थानीय निकाय चुनाव का उदाहरण देते हुए पाठक ने कहा कि उस चुनाव को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था — इसे उन्होंने चुनावी अनियमितता के एक कथित उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
हरियाणा हार और कांग्रेस पर टिप्पणी
पाठक ने हरियाणा में कांग्रेस की हार का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए। उनके अनुसार, SIR से कांग्रेस नहीं हारती — बल्कि पार्टी की अपनी आंतरिक कमियाँ और जनता से कटाव उसकी हार के कारण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठाना एक सुविधाजनक राजनीतिक रणनीति है, जो जवाबदेही से बचने के लिए अपनाई जाती है।
इंडिया गठबंधन और विपक्ष की भूमिका
इंडिया गठबंधन के विरोध-प्रदर्शनों पर पाठक ने कहा कि जिस गठबंधन में वैचारिक तालमेल नहीं हो और दल केवल चुनावी जरूरत के समय एक-दूसरे के साथ आते हों, वह दीर्घकाल में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे ईमानदारी से विपक्ष की भूमिका निभाएँ और वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित रहें। आगे की राजनीतिक राह के बारे में उनका मत था कि अवसर सभी दलों के लिए आते हैं, लेकिन वैचारिक खालीपन के आधार पर बने गठबंधन से स्थायी सफलता नहीं मिलती।