जनमन योजना से बैगा जनजाति के घरों में आया बदलाव: कच्चे से पक्के तक
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षित आवास: बैगा जनजाति को पक्के घर मिले हैं।
- आर्थिक सहायता: लाभार्थियों को दो लाख रुपए की मदद मिलती है।
- सामाजिक परिवर्तन: जीवन स्तर में सुधार आया है।
शहडोल, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम जनमन आवास योजना विशेष रूप से बैगा, सहरिया और भरिया जैसी पिछड़ी जनजातियों के लिए एक अत्यावश्यक सहायता बनकर उभरी है।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य इन समुदायों को सुरक्षित और मजबूत आवास प्रदान करना है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके। इसके प्रभाव से अब इन जनजातीय परिवारों के पुराने कच्चे घरों को सुविधाजनक और स्थायी पक्के मकानों ने बदल दिया है, जिससे उनकी ज़िंदगी में सुरक्षा और स्थिरता आई है।
जिले के बुढार क्षेत्र के ग्राम पकरिया में इस योजना का असर स्पष्ट रूप से सामने आया है, जहां बैगा जनजाति के परिवारों ने अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव अनुभव किया है। पहले जहां ये परिवार कच्चे और जर्जर मकानों में रहने के लिए मजबूर थे और बारिश के समय समस्याओं का सामना करते थे, वहीं अब पक्के घरों की प्राप्ति से उन्हें इन सभी समस्याओं से राहत मिली है। अब ये परिवार बारिश, गर्मी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित हैं और उनका दैनिक जीवन पहले से कहीं अधिक सहज हो गया है।
योजना के लाभार्थी गौकरण बैगा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि उन्हें इस योजना के तहत दो लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उन्होंने अपना पक्का घर बनवाया। उन्होंने कहा कि पहले उनके कच्चे मकान में कीड़ों-मकोड़ों की समस्याएं रहती थीं, लेकिन अब पक्का मकान मिलने से उन्हें इन सभी परेशानियों से मुक्ति मिल गई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।
इसी तरह विश्वनाथ बैगा ने बताया कि पहले उनका घर कच्चा था, लेकिन ग्राम पंचायत से योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन किया और आवश्यक दस्तावेजों के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि उन्हें 20 हजार रुपए मजदूरी के रूप में भी प्राप्त हुए, जिससे उन्हें अतिरिक्त सहारा मिला। उनकी बेटी लक्ष्मी बैगा ने कहा कि पहले कच्चे घर में बारिश के दौरान पानी टपकने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन अब पक्का घर मिलने के बाद वह बेहतर माहौल में पढ़ाई कर पा रही हैं।
लाभार्थी चंद्रिका बैगा ने बताया कि पंचायत सचिव से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने योजना का लाभ लिया और अपना पक्का मकान बनवाया। उनकी पत्नी अर्चना बैगा ने कहा कि पहले कच्चे मकान में दैनिक कार्यों में काफी कठिनाई होती थी, लेकिन अब उन्हें बड़ी राहत मिली है।
वहीं, तेजबली बैगा ने बताया कि बरसात के समय कच्चे घर में रहना बेहद मुश्किल था, लेकिन अब पक्का मकान बनने से उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई है।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पंचायत बुढार के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर दीपक पटेल ने बताया कि यह योजना वित्तीय वर्ष 2023-24 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातियों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि बुढार क्षेत्र में अब तक 2086 लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा गया है, जिनमें से 1752 परिवार अपने पक्के घरों में रह रहे हैं, जबकि शेष के मकान निर्माणाधीन हैं और जल्द ही पूर्ण हो जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को चार किस्तों में कुल दो लाख रुपए की सहायता प्रदान की जाती है।