झारखंड में नगर निकाय चुनाव: हिंसा, फर्जी मतदान और अव्यवस्था के बीच मतदान संपन्न
सारांश
Key Takeaways
- मतदान प्रक्रिया 23 फरवरी को संपन्न हुई।
- हिंसा और विवाद की घटनाएं चिंताजनक हैं।
- 562 मेयर और 5,562 वार्ड पार्षद प्रत्याशी हैं।
- मतगणना 27 फरवरी को होगी।
- मतदाता सूची में गलत जानकारी की शिकायतें आईं।
रांची, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के 48 नगर निकायों में मेयर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान सोमवार को शाम पांच बजे समाप्त हुआ। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रतिशत के अंतिम आंकड़े अभी जारी नहीं किए हैं, लेकिन अनुमान है कि राज्यभर में मतदान का प्रतिशत 45 से 60 के बीच हो सकता है।
मतदान की प्रक्रिया सुबह सात बजे से शुरू हुई, जिसमें रांची, धनबाद, देवघर, आदित्यपुर, चास, मेदिनीनगर, हजारीबाग, गिरिडीह और मानगो के नौ नगर निगमों के साथ-साथ 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत भी शामिल थे। कुल 4304 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहाँ सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
रांची में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, सांसद महुआ माजी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने भी मतदान किया। मतदान के दौरान राज्य के विभिन्न स्थानों से मारपीट, फर्जी मतदान और विवाद की कई शिकायतें आईं।
बोकारो के चास क्षेत्र में एक बूथ पर बवाल के दौरान पुलिस और प्रत्याशी के समर्थकों के बीच झड़प में डीएसपी प्रवीण सिंह घायल हो गए। भोजपुर कॉलोनी में फर्जी मतदान के आरोप में तीन महिलाओं को हिरासत में लिया गया, जिससे वहां तनाव उत्पन्न हो गया।
धनबाद नगर निगम के वार्ड 27 में दो प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच मारपीट हुई, वहीं वार्ड 22 में बूथ लूटने के प्रयास की कोशिश की गई।
गिरिडीह के वार्ड 18 में दो पक्षों के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पथराव और मारपीट के बाद सड़कें जाम कर दी गईं। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। गुमला के अंबेडकर नगर मतदान केंद्र पर भी दो गुटों के बीच विवाद बढ़ गया। जमशेदपुर के जुगसलाई क्षेत्र में फर्जी मतदान के आरोप के चलते लगभग एक घंटे तक मतदान बाधित रहा।
रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में भी दो गुटों के बीच मारपीट हुई। साहिबगंज में चुनाव ड्यूटी के दौरान एक होमगार्ड जवान की राइफल से गलती से गोली चलने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। कई स्थानों पर मतदाताओं ने शिकायत की कि एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों पर दर्ज थे। कुछ मतदाताओं को बूथ बदलने की जानकारी समय पर नहीं मिली, जिससे वे एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकते रहे।
चुनाव प्रबंधन को लेकर दो महत्वपूर्ण मुद्दे भी सामने आए। मतदान कार्य में लगे लगभग 50 हजार कर्मियों के लिए डाक मतपत्र की व्यवस्था नहीं होने से वे अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। इसके अतिरिक्त, पार्षद और मेयर-अध्यक्ष पद के मतपत्रों को एक ही मतपेटी में डालने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। कई प्रत्याशियों ने आशंका जताई कि इससे मतगणना के दौरान अधिक समय लगेगा और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
हालांकि, मतदान संपन्न होने के बाद मेयर और अध्यक्ष पद के लिए 562 और वार्ड पार्षद के लिए 5,562 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई है। अब सभी की निगाहें 27 फरवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।