केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को चेताया: 2047 तक सत्ता में एंट्री असंभव
सारांश
Key Takeaways
- केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को चेतावनी दी कि 2047 तक उनकी सत्ता में एंट्री असंभव है।
- अखिलेश का बयान आस्था का अपमान है।
- कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और खड़गे की स्थिति पर टिप्पणी।
- भारत कृषि और नवाचार में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- किसानों को फसलों के नुकसान पर मुआवजा दिया जाएगा।
लखनऊ, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव हताश और निराश हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि 2047 तक सत्ता में उनकी एंट्री नामुमकिन है।
डिप्टी सीएम ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अखिलेश का यह कार्य आस्था का अपमान है, जिसे समाज और राष्ट्र बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसे बयानों से लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है, जो बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि जनता ने उन्हें सत्ता से हटा दिया है और उनके बेतुके बयानों से कुछ भी हासिल नहीं होगा। वे 2047 तक सत्ता से बाहर ही रहेंगे।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह कड़वा सच है कि खड़गे और राहुल मिलकर कांग्रेस को खुद ही समाप्त कर रहे हैं। राहुल की नेतृत्व में कांग्रेस अगले महीने शतकीय हार का रिकॉर्ड बनाने वाली है। आज कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति हास्यास्पद है। खड़गे को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रवाद से ओतप्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का जितना तिरस्कार कांग्रेस करती है, जनता उतनी ही तेजी से उनके विचारों को अपनाती है।
डिप्टी सीएम बुधवार को लखनऊ के एमिटी विश्वविद्यालय में खाद्य सुरक्षा पर एक कार्यक्रम में उपस्थित हुए, जहां उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत कृषि, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पाद भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
इसके अलावा, फसलों के नुकसान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, बारिश जैसी घटनाएं प्राकृतिक आपदाएं हैं, जिनके लिए न तो सरकार और न ही कोई व्यक्ति जिम्मेदार है। भविष्य में हमें ऐसे उपायों की खोज करनी होगी, जिससे हमारे किसान ऐसे संकटों से उबर सकें।