क्या राहुल गांधी के लिए देश से ज्यादा राजनीति महत्वपूर्ण है?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी ने चीन-भारत की तुलना की है।
- रोहन गुप्ता ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
- कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप।
- राजनीतिक स्वार्थ और राष्ट्रीय हित का टकराव।
अहमदाबाद, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के चीन-भारत की तुलना करने वाले बयान पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए देश से अधिक उनकी राजनीति की अहमियत है।
राहुल गांधी ने भारत-चीन की तुलना करते हुए कहा कि चाहे मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक्स हो, चीन भारत से आगे है।
अहमदाबाद में भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि ऐसे नेता को भारत की अर्थव्यवस्था 'डेड' लगती है, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है। पीएम मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति कर रहा है, लेकिन राहुल गांधी को यह दिखाई नहीं देता। पूरी दुनिया जानती है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, लेकिन राहुल गांधी को यह जानकारी नहीं है। हर बार चीन का नाम लेकर भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करना उचित नहीं है। यदि भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है, तो वह चीन से कैसे पीछे रह सकता है?
उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में भारत आगे बढ़ रहा है। 'मेक इन इंडिया' पहल सफल हो रही है और मोबाइल सेक्टर में भारत ने शानदार प्रगति की है, लेकिन विपक्ष के नेता को यह सब दिखाई नहीं देता। मुझे लगता है कि उनके लिए राजनीति देश से ऊपर है।
रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से तुष्टीकरण की नीति का पालन कर रही है और अब उसका असली चेहरा सामने आ रहा है। बिहार में भी यही हुआ था। सब जानते हैं कि कांग्रेस सिर्फ तुष्टीकरण करती है। मुस्लिम समुदाय भी यह समझ चुका है कि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण की राजनीति करती है। यदि कांग्रेस ने मुस्लिमों की भलाई के लिए वास्तव में कुछ किया होता तो आज मुस्लिम समुदाय पिछड़े वर्ग में नहीं होता।
जर्मन चांसलर वाले विवाद पर रोहन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस ने जर्मन चांसलर के दौरे के बजाय राहुल गांधी को प्राथमिकता देकर अपनी असली विचारधारा उजागर कर दी है। जब राष्ट्रीय हितों और विदेशी संबंधों की बात आती है, तब भी कांग्रेस के लिए पार्टी की राजनीति देश से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। विदेशी नेता के आने पर भी वे राजनीतिक दांव-पेच करने से नहीं चूकते। ऐसी मानसिकता वाली पार्टी पर देश कभी भरोसा नहीं कर सकता।