क्या कई धरोहर सरकारी जमीन पर हैं, तो क्या बुलडोजर चला देंगे: एसटी हसन?
सारांश
Key Takeaways
- संस्कृति और धरोहर का संरक्षण आवश्यक है।
- महंगाई और बेरोजगारी पर ध्यान देना चाहिए।
- नफरत की राजनीति से बचना चाहिए।
- सरकारी जमीन पर धरोहरों का निर्माण कानूनी विवाद का विषय हो सकता है।
- राजनीति में धार्मिक मुद्दों का संवेदनशीलता से निपटना चाहिए।
मुरादाबाद, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद पर डीएम द्वारा इसे सरकारी जमीन बताने के बाद जैन बंधु की ओर से दिए गए बयान पर सपा के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद, मंदिर और ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं, तो क्या उन पर भी बुलडोजर चला दिया जाएगा।
मुरादाबाद में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सपा नेता ने कहा कि मस्जिद सरकारी जमीन पर है या फिर वक्फ की है, इस पर चर्चा करने की बजाय देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। कब तक हिंदू-मुस्लिम की राजनीति होती रहेगी? जैन बंधु की जुबान पर लगाम लगनी चाहिए। यह देशहित में है या अहित में है। सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद जरूरी नहीं है कि वक्फ की हो। मंदिर भी सैकड़ों साल पुराने हैं, जब वे सरकारी भूमि पर आ जाते हैं तो क्या बुलडोजर चला दिया जाएगा।
यह मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी है, 500 साल पुराने दस्तावेज तो ला नहीं सकते। दिल्ली की शाही जामा मस्जिद पर भी बुलडोजर चलाने की बात होगी क्या, उनके पास भी दस्तावेज नहीं होंगे। सैकड़ों साल पुराने मंदिरों के पास भी कागज नहीं होंगे तो क्या बुलडोजर चलाए जाएंगे? कई ऐतिहासिक धरोहरें सरकारी जमीन पर हैं, क्या उन पर भी बुलडोजर की कार्रवाई होगी?
उन्होंने कहा कि लोगों में नफरत की राजनीति नहीं फैलानी चाहिए, यह बंद होनी चाहिए। राजनीति करनी है तो रोजगार पर बात होनी चाहिए। मिडिल क्लास और बिजनेसमैन किस हद तक परेशान हो गए हैं। देश में हिंदू-मुसलमान की राजनीति क्यों हो रही है? क्या देश को कमजोर करना चाहते हैं?
ओवैसी के बयान पर उन्होंने कहा कि क्या ओवैसी इसके लिए जिम्मेदार हैं? उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदू-मुसलमान करके राजनीति कर रहे हैं, वही जिम्मेदार हैं। वे नफरत फैला रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को अब इस साजिश को समझना चाहिए। यह देश के लिए एक गंभीर खतरा है। दुनिया पहले से ही ग्लोबल संघर्षों के खतरों का सामना कर रही है, और हमारे दुश्मन हमारे चारों ओर हैं। हमारे अपने देश में जो लोग फूट डालते हैं और नफरत फैलाते हैं, वही लोग भारत को अंदर से कमजोर कर सकते हैं। सरकार को इस खतरे को पहचानने की जरूरत है।
ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर ट्रंप के 25 प्रतिशत टैरिफ पर सपा नेता ने कहा कि हमें ट्रंप को राष्ट्रपति कहने पर शर्म आ रही है। उन्हें डकैत कहें तो कोई दिक्कत नहीं होगी। वेनेजुएला को लेकर हमने उनका रवैया देखा है। हमारे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। अगर हम संपन्न हो जाते हैं तो डकैतों से खतरा है। ट्रंप धमकी इसलिए दे रहे हैं कि सारे देश अमेरिका के दबाव में काम करें।