क्या यूपी में भाजपा तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी? : केशव प्रसाद मौर्य
सारांश
Key Takeaways
- उत्तर प्रदेश में भाजपा की तीसरी बार जीत की संभावना।
- कांग्रेस के नेताओं का चुनावी मंच पर उपस्थित होना।
- जी रामजी अधिनियम से ग्रामीण विकास को मजबूती।
- भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नए उपाय।
- क्रीड़ा आयोजनों में भाजपा की भागीदारी और समर्थन।
वाराणसी, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में कहा कि कांग्रेस के नेता प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी या अखिलेश यादव जैसे किसी भी व्यक्ति को चुनाव में आगे आने दें, लेकिन कमल खिलकर ही रहेगा।
उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि जो भी जोड़ना है, जोड़ लें। उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भी कमल खिलने जा रहा है। आने वाला समय भाजपा का है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। भाजपा वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए एक मजबूत विकल्प है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आयोजित 72वीं सीनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप की सफलता के लिए सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी। इसमें पुरुष और महिला दोनों टीमें भाग ले रही हैं।
उन्होंने बताया कि यह चैंपियनशिप आयोजन समिति के सभी सदस्यों के सहयोग से सफल हो रही है। आज भारतीय रेलवे के खिलाड़ियों ने पुरुष राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती, जबकि केरल उपविजेता रहा।
इससे पहले, केशव प्रसाद मौर्य ने जी रामजी के बारे में बताया कि यह कानून गांवों के आधारभूत ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा, भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करेगा, और मनरेगा को स्मार्ट गांव मॉडल में बदल देगा।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत ग्रामीण श्रमिकों को अब 100 के स्थान पर 125 दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी और भुगतान साप्ताहिक किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने जी रामजी अधिनियम–2025 के लाभों को साझा किया।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के जरिए विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित गांव का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। ग्राम पंचायतों को विकास मानकों के आधार पर ए, बी और सी श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे सभी गांवों को समान विकास के अवसर मिल सकें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों की योजना बनाने के लिए पीएम गति शक्ति, जीआईएस और अन्य आईटी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। जॉब कार्ड तीन वर्ष के लिए बनाए जाएंगे और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक, जीआईएस मोबाइल एप और फेस रीडिंग जैसी डिजिटल तकनीकों को लागू किया जाएगा।