जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर 155 ग्राम सुनहरा पाउडर लेकर भागा शख्स, CISF ने दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर 17 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कर्मियों ने एक व्यक्ति को लगभग 155 ग्राम सुनहरे पाउडर जैसे अज्ञात पदार्थ के साथ पकड़ा, जिसे उसके बैग में रखे एक अंडरगारमेंट के भीतर छिपाकर रखा गया था। आरोपी स्क्रीनिंग क्षेत्र से भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे CISF कर्मियों ने स्टेशन के निकास द्वार के पास जाकर दबोचा।
घटनाक्रम: कैसे हुई पकड़
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर एक्स-रे बैगेज स्क्रीनिंग के दौरान एक संदिग्ध और घनी वस्तु की छवि सामने आई। इस पर CISF कर्मियों ने संबंधित व्यक्ति से पूछताछ करनी चाही, लेकिन वह कथित तौर पर स्क्रीनिंग क्षेत्र छोड़कर भागने लगा।
सतर्कता दिखाते हुए CISF जवानों ने तत्काल उसका पीछा किया और निकास द्वार के पास, परिसर से बाहर निकलने से पहले ही उसे पकड़ लिया। बैग की तलाशी में एक अंडरगारमेंट के भीतर छिपाया हुआ लगभग 155 ग्राम का सुनहरे रंग का पाउडर जैसा पदार्थ बरामद हुआ।
आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि
आरोपी की पहचान मोहम्मद शोएब के रूप में हुई है। वह मूलतः उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खालापार का निवासी बताया गया है। उसने अपना एक पता कुआलालंपुर, मलेशिया का भी दर्ज कराया।
प्रारंभिक पूछताछ में शोएब ने बताया कि वह मलेशिया में रहकर वस्त्र उद्योग से जुड़ा है। उसने यह भी दावा किया कि उसकी पत्नी मलेशियाई नागरिक हैं और उनके दो बच्चे भी मलेशिया के नागरिक हैं। उसके अनुसार, वह 16 अक्टूबर को यह पदार्थ लेकर दिल्ली पहुँचा था और जामा मस्जिद क्षेत्र के एक होटल में ठहरा हुआ था। घटना वाले दिन वह लाजपत नगर जाने के इरादे से स्टेशन पर आया था।
नारकोटिक्स जाँच और कस्टम्स का रुख
बरामदगी के बाद पुलिस को शुरुआत में संदेह हुआ कि यह कोई मादक या मन:प्रभावी पदार्थ हो सकता है। इस आशंका के चलते नारकोटिक्स विभाग से जाँच कराई गई, परंतु जाँच में यह संदेह निराधार साबित हुआ — पदार्थ किसी भी मादक या मन:प्रभावी श्रेणी में नहीं आता।
गौरतलब है कि मामले की सूचना सीमा शुल्क (कस्टम्स) विभाग को भी दी गई, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
कानूनी कार्रवाई
शोएब पदार्थ के स्वामित्व को साबित करने में असफल रहा और उसके पास इसे रखने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था। इसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट मेट्रो पुलिस स्टेशन में उसके विरुद्ध दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
यह मामला मेट्रो सुरक्षा जाँच की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है — CISF कर्मियों की सतर्कता ने एक संदिग्ध व्यक्ति को बिना दस्तावेज़ के अज्ञात पदार्थ ले जाने से रोका। अब जाँच एजेंसियाँ पदार्थ की सटीक प्रकृति और उसके कथित उपयोग का पता लगाने में जुटी हैं।