मनोज बाजपेयी की फिल्म 'गवर्नर': आरबीआई की गोपनीयता के चलते किसी अधिकारी से नहीं मिले, बताया किरदार की तैयारी का तरीका
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता मनोज बाजपेयी अपनी आगामी फिल्म 'गवर्नर' के साथ एक अलग ही भूमिका में दर्शकों के सामने आने को तैयार हैं। यह फिल्म 1990 के दशक में भारत को गहरे आर्थिक संकट और दिवालियेपन की कगार से उबारने वाले अपेक्षाकृत कम चर्चित अर्थशास्त्री एवं पूर्व भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) गवर्नर एस. वेंकिटरमणन की सच्ची कहानी पर आधारित एक राजनीतिक थ्रिलर है। मुंबई में मीडिया से बातचीत में बाजपेयी ने खुलासा किया कि इस किरदार की तैयारी के लिए उन्होंने RBI के किसी भी अधिकारी या पूर्व गवर्नर से मुलाकात नहीं की।
आरबीआई की गोपनीयता बनी तैयारी की सीमा
मनोज बाजपेयी ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिज़र्व बैंक अत्यंत कड़े नियमों और गोपनीयता के दायरे में काम करता है, जिसके चलते उनके लिए किसी अधिकारी से सीधे मिलना संभव नहीं था। उन्होंने कहा, "मैं आरबीआई की इमारत के अंदर नहीं गया हूं और न ही मैंने किसी भी गवर्नर से मुलाकात की है। मुझे लगता है कि यह सही भी है, क्योंकि वे देश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक की सेवा करते हैं और आसानी से उपलब्ध नहीं होते।"
उन्होंने आगे जोड़ा, "पूरा विभाग ही ऐसा है। हम उसके अंदर जाकर तस्वीरें भी नहीं ले सकते। यह एक अत्यंत प्रतिबंधित क्षेत्र है।" यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत के केंद्रीय बैंक की संस्थागत संस्कृति कितनी बंद और अनुशासित है।
दस्तावेज़ों और उपलब्ध सामग्री से की तैयारी
किरदार को जीवंत करने के लिए बाजपेयी ने उस दौर से जुड़ी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री और दस्तावेज़ों का सहारा लिया। उन्होंने बताया, "उस समय जो सामग्री हमारे लिए उपलब्ध थी, मैंने उसी का इस्तेमाल किया। मैं आज भी उससे जुड़े कुछ दस्तावेज अपने पास रखता हूं, ताकि यदि मुझे किसी बुनियादी जानकारी की जरूरत पड़े तो मैं उन्हें देख सकूं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि मेरे पास कोई गलत जानकारी न रहे।"
गौरतलब है कि एस. वेंकिटरमणन का कार्यकाल उस नाज़ुक दौर में आया जब भारत 1991 के भुगतान संतुलन संकट से जूझ रहा था और देश को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। ऐसे संवेदनशील ऐतिहासिक किरदार को पर्दे पर उतारना स्वाभाविक रूप से बड़ी जिम्मेदारी है।
अभिनेता की दृष्टि: जिज्ञासा और बुनियादी ज्ञान ज़रूरी
बाजपेयी ने इस अनुभव को एक व्यापक अभिनय-दर्शन से जोड़ा। उनका कहना है कि किसी भी विषय का विशेषज्ञ होना ज़रूरी नहीं, लेकिन जिज्ञासा और बुनियादी समझ एक अभिनेता की परिपक्वता की पहचान है।
उन्होंने कहा, "एक अभिनेता के तौर पर आपको जिज्ञासु होना चाहिए। जिंदगी, दुनिया में हो रही घटनाओं और विभिन्न विषयों के प्रति आपके मन में जिज्ञासा होनी चाहिए। मैं मानता हूं कि कोई भी व्यक्ति हर चीज का विशेषज्ञ नहीं हो सकता, लेकिन दुनिया और हमारे समाज के विभिन्न पहलुओं के बारे में उसे बुनियादी जानकारी जरूर होनी चाहिए।"
फिल्म का महत्व: भूला दिया गया आर्थिक नायक
फिल्म 'गवर्नर' उस दौर की कहानी है जिसे भारत के आधुनिक आर्थिक इतिहास का सबसे निर्णायक मोड़ माना जाता है। एस. वेंकिटरमणन जैसे नौकरशाह और अर्थशास्त्री अक्सर राजनीतिक चमक के पीछे छिप जाते हैं, और यह फिल्म उन्हें केंद्र में लाने का प्रयास है। यह ऐसे समय में आई है जब भारतीय दर्शकों की रुचि ऐतिहासिक और बायोपिक शैली की फिल्मों में तेज़ी से बढ़ रही है।
फिल्म की रिलीज़ डेट की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर सिनेप्रेमियों में उत्सुकता पहले से ही बन चुकी है।