क्या मौलाना मदनी का बयान समाज को बांटने की कोशिश है?
सारांश
Key Takeaways
- मौलाना महमूद मदनी के बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
- भाजपा ने इस बयान की निंदा की है।
- सामाजिक एकता को बनाए रखने की आवश्यकता है।
- राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
- इस मुद्दे पर संवाद और सहिष्णुता का महत्व है।
लखनऊ, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राजनीतिक क्षेत्र में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी के हालिया बयान ने सियासी चर्चाएं तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मदनी के बयान की तीखी आलोचना की है।
दानिश आजाद अंसारी, योगी सरकार के मंत्री, ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह बेहद दुखद है कि कुछ लोग, जैसे मदनी, मुसलमानों को हमेशा गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। जब भारत विकास के मार्ग पर तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में मुस्लिम समुदाय को भटकाने वाले ऐसे बयान हमारी चिंता को दर्शाते हैं।
भाजपा विधायक पंकज सिंह ने कहा कि यह एक छोटा और नकारात्मक बयान है, जो समाज को बांटने का प्रयास करता है। हम सब एकता के लिए काम कर रहे हैं और सरकार पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सभी के लिए सामाजिक कल्याण योजनाएं लागू कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि देश का संचालन संविधान और कानून के तहत होता है। जो लोग जिहाद से जुड़े हैं, उनके लिए अब यहाँ कोई स्थान नहीं है।
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि मौलाना महमूद मदनी ने राष्ट्रीय ध्वज और जिहाद के विषय पर असंगत बयान दिए हैं। मैं उनकी बातों की कड़ी निंदा करता हूँ और सरकार से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा करता हूँ। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यहाँ जिहाद के लिए कोई स्थान नहीं है।