क्या नवाब मलिक ने बीएमसी चुनाव में फर्जी मतदान के आरोपों को खारिज किया?
सारांश
Key Takeaways
- मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
- फर्जी मतदान के आरोपों का खंडन किया गया है।
- दोहरा मतदान असंभव है।
- मतदाता सूची में बदलाव एक राजनीतिक प्रक्रिया है।
- लोकतांत्रिक शुचिता बनाए रखना आवश्यक है।
मुंबई, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक ने महाराष्ट्र के नागरिकों से बीएमसी चुनाव में भारी संख्या में मतदान करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने फर्जी मतदान के आरोपों को सख्ती से खारिज किया और इसे बुनियादी बताया।
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बीएमसी चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस अवसर पर, मैं सभी नागरिकों से निवेदन करता हूँ कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए घरों से बाहर आएं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो बीएमसी की कमान किसी ऐसे व्यक्ति के हाथों में जा सकती है, जिसका राज्य की जनता के हितों से कोई संबंध नहीं होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि लोग बड़ी संख्या में भाग लेकर लोकतंत्र के इस महापर्व को मजबूती प्रदान करें।
नवाब मलिक ने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि हाथों की स्याही मिट रही है, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। पहले स्याही कांडी से लगाई जाती थी, जबकि अब मार्कर का उपयोग किया जा रहा है। किसी भी स्थिति में स्याही नहीं मिट सकती। यदि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान करने का प्रयास करेगा, तो उसे आसानी से पहचाना जा सकेगा। 15 साल पहले तस्वीरें नहीं होती थीं, लेकिन अब सभी मतदाताओं के नाम तस्वीरों के साथ दर्ज हैं। इस प्रकार, दोहरा मतदान असंभव है।
उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोहरा मतदान न हो। आज के समय में एक ऐसी प्रणाली स्थापित हो चुकी है, जिसके तहत दोहरा मतदान करना लगभग असंभव है। यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता के रूप में दो स्थानों पर है, तो हम उसे चिन्हित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति दो बार मतदान न कर सके। मतदान के दौरान लोकतांत्रिक शुचिता को बनाए रखना हमारा मुख्य कार्य है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मतदाताओं के नामों में बदलाव एक राजनीतिक प्रक्रिया है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो साल भर चलती है, जिसमें अपात्र मतदाताओं को चिन्हित किया जाता है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी अपात्र मतदाता इस महापर्व में भाग न ले सके।
इस दिशा में हमने एक पूर्ण रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसके तहत हम पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं। इससे लोकतांत्रिक मर्यादा की शुचिता बनी रहेगी। इसके लिए हमें राजनेताओं को प्रशिक्षित करना होगा। तभी हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। यह एक सतत प्रक्रिया होगी जो 12 वर्षों तक चलेगी।
वन मंत्री को तीन से चार बूथ पर जाना पड़ा, तब जाकर उन्होंने मतदान किया। इस पर नवाब मलिक ने कहा कि यह दर्शाता है कि वे अपनी मतदाता सूची की जांच नहीं करते हैं। यदि उन्होंने अपनी मतदाता सूची देखी होती, तो उन्हें ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। हमारे यहां ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती है। यदि इतने बड़े मंत्री को अपना पोलिंग बूथ नहीं पता है, तो यह दर्शाता है कि उनका संगठन पूरी तरह से निष्क्रिय है।