भोपाल की 'रूबात' संपत्तियों पर एनएचआरसी का ध्यान, हाजियों के अधिकारों का उल्लंघन
सारांश
Key Takeaways
- एनएचआरसी ने 'रूबात' संपत्तियों के प्रबंधन में लापरवाही पर कार्रवाई की है।
- हाजियों के अधिकारों के उल्लंघन की गंभीरता को लेकर जांच शुरू की गई है।
- मुतवल्ली पर आरोप हैं कि उन्होंने वित्तीय अनियमितताएं कीं।
- शिकायतकर्ता ने स्वतंत्र जांच और कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
- राज्य सरकार को संपत्तियों की स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भोपाल की 'रूबात' संपत्तियों के संबंध में मक्का और मदीना में गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है। इन संपत्तियों की उचित देखरेख में कमी के चलते सऊदी सरकार द्वारा इन्हें हाजियों के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इसे भोपाल के हाजियों के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा रुख अपनाया है।
आयोग की खंडपीठ (जिसकी अध्यक्षता एक सदस्य कर रहे हैं) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय, अल्पसंख्यक मंत्रालय, मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और एमपी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) पेश करने का निर्देश दिया है।
शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि रूबात (वक्फ संपत्तियों) के मुतवल्ली सबा अली खान पटौदी और उनके सहयोगी सिकंदर हफीज ने इन संपत्तियों के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती और वित्तीय अनियमितताएं कीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि मुतवल्ली ने सऊदी अधिकारियों के सामने वक्फ का सही प्रतिनिधित्व नहीं किया, जिससे इन संपत्तियों पर नियंत्रण कमजोर हो गया और गरीब हाजियों को आवश्यक आवास सुविधा नहीं मिल पाई।
इसके अतिरिक्त, मदीना रूबात से अवैध धन हस्तांतरण, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन, वार्षिक ऑडिट में पारदर्शिता की कमी और व्यक्तिगत लोगों के लिए सुविधाओं का दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इस मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिसमें सेंट्रल वक्फ काउंसिल और भारतीय दूतावास की भागीदारी हो। साथ ही मुतवल्ली सबा अली खान को तुरंत हटाने, विदेशी लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और हाजियों के अधिकारों की बहाली के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
आयोग ने माना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। इसी आधार पर मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामला दर्ज करते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह यह जांचे कि क्या 1947 के विभाजन के समय इन संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था। यदि ऐसा हुआ था, तो क्या वर्तमान में इनका प्रबंधन राज्य सरकार के पास है या नहीं, और यदि नहीं, तो इसमें क्या अनियमितताएं हुई हैं।
आयोग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें और उसकी एक प्रति आयोग को ईमेल के माध्यम से भी भेजें।