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पद्मश्री 'दाऊ' भगवानदास रैकवार का भोपाल में निधन, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को लगा झटका

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पद्मश्री 'दाऊ' भगवानदास रैकवार का भोपाल में निधन, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को लगा झटका

सारांश

भोपाल में पद्मश्री भगवानदास रैकवार, जिन्हें 'दाऊ' के नाम से जाना जाता है, का निधन हो गया। उन्होंने बुंदेलखंड की पारंपरिक 'अखाड़ा' संस्कृति को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य बातें

भगवानदास रैकवार का जीवन 'अखाड़ा' संस्कृति को बचाने में समर्पित था।
उन्होंने 1964 में 'छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़ा' की स्थापना की।
केंद्र सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया।
उनका निधन बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक बड़ी क्षति है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

भोपाल, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पद्मश्री भगवानदास रैकवार, जिन्हें 'दाऊ' के नाम से जाना जाता है, का शनिवार रात भोपाल के एम्स में 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

वे सांस की बीमारी से पीड़ित थे और शनिवार की रात लगभग 9.30 बजे उन्होंने अपने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मध्य प्रदेश के खेल और सांस्कृतिक क्षेत्र, विशेषकर बुंदेलखंड में शोक की लहर दौड़ गई।

बुंदेलखंड की धरती के सच्चे सपूत, भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन को पारंपरिक 'अखाड़ा' संस्कृति और 'लाठी' चलाने की कला को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में समर्पित कर दिया।

उन्होंने 1964 में अपने सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए सागर में ऐतिहासिक 'छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़ा' की स्थापना की। उन्होंने दशकों में एक हजार से अधिक छात्रों को पारंपरिक हथियारों और आत्मरक्षा की तकनीकों में प्रशिक्षित किया और 'बुंदेली' युद्ध कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

खेल और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देते हुए केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बुंदेली मार्शल आर्ट को वैश्विक पहचान दिलाने वाले भगवानदास रैकवार जी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत को शांति और उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।

भगवानदास रैकवार की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें 7 अप्रैल को एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। चिकित्सा टीम के प्रयासों के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल बुंदेलखंड के लिए बल्कि पूरे देश के लिए। उनकी मेहनत और समर्पण ने पारंपरिक मार्शल आर्ट को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवानदास रैकवार का योगदान क्या था?
भगवानदास रैकवार ने पारंपरिक 'अखाड़ा' संस्कृति और 'लाठी' चलाने की कला को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पद्मश्री पुरस्कार कब मिला था?
भगवानदास रैकवार को 25 जनवरी को केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
भगवानदास रैकवार को किस नाम से जाना जाता था?
उन्हें 'दाऊ' के नाम से जाना जाता था।
भगवानदास रैकवार का निधन कब हुआ?
उनका निधन 19 अप्रैल को भोपाल के एम्स में हुआ।
उनकी बीमारी क्या थी?
वे सांस की बीमारी से जूझ रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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