पलामू में स्वास्थ्य सहिया गीता देवी हत्याकांड: आरोपियों को फाँसी की माँग, सिलदिली से निकला आक्रोश मार्च
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पलामू जिले में स्वास्थ्य सहिया गीता देवी की कथित हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और लूट के विरोध में रविवार, 25 अक्टूबर को ग्रामीणों ने सिलदिली गांव से आक्रोश मार्च निकाला और आरोपियों को फाँसी की सजा देने की माँग की। पुलिस इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि पीड़ित परिजन और स्थानीय ग्रामीण फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग पर अडिग हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात
नावाबाजार थाना क्षेत्र के बसना गांव निवासी गीता देवी 20 अक्टूबर की रात दुर्गा पूजा पंडाल से लौट रही थीं, तभी वे लापता हो गईं। अगले दिन उनका शव घर के समीप धान के खेत से बरामद किया गया।
पुलिस जाँच के अनुसार, चार आरोपियों ने उन्हें सुनसान रास्ते पर रोककर आभूषण लूटे और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों को आशंका थी कि पीड़िता उन्हें पहचान लेंगी, इसलिए उन्होंने कथित तौर पर रस्सी से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी के निर्देश पर गठित विशेष जाँच दल (SIT) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपरंजन पांडे उर्फ छोटू, रोहित पांडे, आकाश उर्फ भुलन और विक्की पासवान के रूप में हुई है।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर मृतका के आभूषण, मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल की गई रस्सी और दो मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं।
जनता का आक्रोश और सड़क जाम
घटना के तुरंत बाद इलाके में व्यापक आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों और परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी, कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को मुआवजे की माँग को लेकर मेदिनीनगर-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-39 को कई घंटों तक जाम रखा था।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में महिला सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पांडु थाना क्षेत्र के सिलदिली गांव से निकाले गए रविवार के आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए और नारे लगाए कि दोषियों को फाँसी से कम कोई सजा मंजूर नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया और माँग की कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए।
कांग्रेस अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत किशोर समेत विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जाँच और सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की माँग दोहराई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि SIT की जाँच जारी है और अदालत में आरोप-पत्र दाखिल होना बाकी है। सांसद की माँग और सामाजिक दबाव के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की संभावना बढ़ी है। पीड़ित परिवार और ग्रामीण तब तक अपना विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं जब तक दोषियों को कठोरतम सजा न मिले।