क्या आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे पशुपति कुमार पारस?
सारांश
Key Takeaways
- पार्टी संगठन को मजबूती.
- सदस्यता अभियान में तेजी.
- फरवरी-मार्च से यात्राएँ.
- महागठबंधन से दूरी.
- बिहार की राजनीतिक स्थिति.
पटना, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2029 में तीन साल का वक्त है। अभी हम किसी गठबंधन में नहीं हैं और हमारी प्राथमिकता पार्टी संगठन को मजबूत करना है। पार्टी का सदस्यता अभियान तेज किया जाएगा और फरवरी-मार्च से यात्राएं आरंभ की जाएंगी।
पटना में उन्होंने कई मुद्दों पर राष्ट्र प्रेस से बातचीत की। मकर संक्रांति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि खरमास को अशुभ समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। 14 जनवरी को यह समय समाप्त हो गया है और नया साल शुरू हो चुका है।
उन्होंने कहा कि साल 2025 हमारे लिए बहुत बुरा था, लेकिन यह अच्छे समय के आने का संकेत है।
पशुपति पारस ने लोकसभा चुनाव 2029 का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तीन साल बाकी हैं। हम पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे, फरवरी-मार्च से सम्मेलन आरंभ करेंगे और लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगे।
महागठबंधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे महागठबंधन में नहीं थे और उन्हें टिकट नहीं दिया गया। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन वह भी गठबंधन के माध्यम से चुनाव लड़ती है। विचारों की समानता रखने वाली पार्टियों के साथ गठबंधन किया जाता है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की हार पर उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन ठीक से होता, तो यह स्थिति नहीं होती। कई दलों के साथ छल हुआ। महागठबंधन के लोगों को आत्मविश्वास हो गया था और चुनाव परिणाम से पहले ही उन्होंने खुद को विजेता घोषित कर दिया। सहयोगी दलों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिसका परिणाम आप सभी ने देखा। राजनीति में छोटे दलों को भी साथ रखना चाहिए। बिहार की जनता भी यह नहीं सोच सकती थी कि हालात इतने बुरे होंगे। हमें जनता के मैंडेट का सम्मान करना होगा।
तेजस्वी यादव के बारे में उन्होंने कहा कि विदेश दौरे के बाद उनकी मीडिया से बातचीत सही थी, लेकिन चुनावी हार के बाद विदेश नहीं जाना चाहिए था। इससे कार्यकर्ताओं को गलत संदेश मिलता है। हार के बाद उन्हें जनता के बीच होना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में हार की वजह आपसी समन्वय की कमी थी। समय से पहले सीएम और डिप्टी सीएम के नामों की घोषणा करना उचित नहीं था। एक ही सीट पर गठबंधन के लोग चुनाव लड़ रहे हैं। 12 सीटों पर यह स्थिति देखने को मिल रही है। तेजस्वी यादव को तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में आना चाहिए था, जहां मैं गया था। बड़े भाई की हैसियत से उन्हें निमंत्रण देने जाना चाहिए था। परिवार में जो मतभेद चल रहा है, वह समाप्त हो जाता।