पेटा इंडिया का रूसी कलाकार को निर्देश: चंचल हाथी का प्रिंट हटाएं या सभी आय दान करें

Click to start listening
पेटा इंडिया का रूसी कलाकार को निर्देश: चंचल हाथी का प्रिंट हटाएं या सभी आय दान करें

सारांश

चंचल हाथी की मौत के बाद पेटा इंडिया ने रूसी कलाकार को चिट्ठी भेजी, जिसमें प्रिंट हटाने या आय दान करने का अनुरोध किया गया है। हाथियों के संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विचार करें।

Key Takeaways

  • चंचल हाथी की मौत ने संरक्षण के मुद्दे को फिर से जागृत किया है।
  • पेटा इंडिया ने कलाकार को प्रिंट हटाने का निर्देश दिया है।
  • हाथियों का संरक्षण महत्वपूर्ण है और इसके लिए दान का आह्वान किया गया है।
  • मैकेनिकल एलिफेंट प्रोजेक्ट असली हाथियों के संरक्षण में सहायक है।
  • इस मामले ने हाथियों के साथ व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

जयपुर, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान में एक फोटोशूट के लिए चमकीले गुलाबी रंग में रंगे गए हाथी चंचल की मौत के बाद पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (पेटा इंडिया) ने रूसी कलाकार जूलिया बुरुलेवा को एक चिट्ठी भेजी है। इस पत्र में उनसे अनुरोध किया गया है कि वे अपनी वेबसाइट से उस कमर्शियल प्रिंट को तुरंत हटा लें या उस प्रिंट से होने वाली सारी कमाई भारत में हाथियों के संरक्षण या सुरक्षा के लिए दान करें। बताया जा रहा है कि ये प्रिंट्स 3 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत में बेचे जा रहे हैं।

कुछ समय पहले चंचल नाम की इस हथिनी को गुलाबी रंग में रंगा गया था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई थीं। अब जब चंचल की मौत की खबर सामने आई है, तो इस मुद्दे ने फिर से तूल पकड़ लिया है और लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।

चिट्ठी में पेटा इंडिया की वेटरनरी मामलों की सीनियर डायरेक्टर डॉ. मिनी अरविंदन ने लिखा, "आप या तो उस प्रिंट को तुरंत हटा लें जिसमें हाथी चंचल को दिखाया गया है, या फिर गुलाबी हाथी वाले प्रिंट की बिक्री से होने वाली सारी कमाई भारत में हाथियों को उनके जंगल वाले घरों में रखने के काम में दान करें। यह दान पेटा इंडिया के 'मैकेनिकल एलीफेंट प्रोजेक्ट' को दिया जा सकता है या फिर वाइल्डलाइफ एसओएस जैसे किसी हाथी अभयारण्य को दिया जा सकता है।"

चंचल की उम्र के बारे में भी सवाल उठाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसकी उम्र लगभग 70 साल थी। पर्यावरण मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलिफेंट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 65 साल के बाद हाथियों को रिटायर कर देना चाहिए। ऐसे में इतनी उम्रदराज़ हाथी को इस तरह के कामों में इस्तेमाल करना गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

कलाकार ने यह दावा किया था कि हाथी पर किया गया रंग सुरक्षित था और इससे उसकी मौत का कोई संबंध नहीं है। लेकिन पेटा इंडिया ने इस दावे पर भी सवाल उठाए हैं। डॉ. अरविंदन का कहना है कि यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि रंग का कोई असर नहीं पड़ा।

इस पूरे मामले ने जयपुर के आमेर किले में हाथियों के इस्तेमाल पर भी बहस छेड़ दी है। पेटा इंडिया का कहना है कि वहां हाथियों को जंजीरों में बांधकर रखा जाता है और उन्हें नियंत्रित करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।

पत्र में यह भी बताया गया है कि चंचल का मालिक सादिक खान वही व्यक्ति हो सकता है, जिसके पास पहले मालती नाम की हथिनी थी। मालती को पेटा इंडिया के अभियान के बाद बचाया गया था।

इसके अलावा, हाथियों के साथ इस तरह के व्यवहार से इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, 2024 में एक रूसी पर्यटक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था, जब एक हाथी ने उसे जमीन पर पटक दिया था।

पेटा इंडिया का मैकेनिकल एलिफेंट प्रोजेक्ट भी इस चर्चा में सामने आया है। इस प्रोजेक्ट के तहत असली हाथियों की जगह मशीन से बने हाथियों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे असली हाथियों को जंगल में उनके परिवार के साथ रहने का मौका मिलता है।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे जानवरों का उपयोग मानव मनोरंजन के लिए किया जा रहा है। यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें जानवरों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

चंचल हाथी कौन था?
चंचल एक हाथी था जिसे एक फोटोशूट के लिए गुलाबी रंग में रंगा गया था।
पेटा इंडिया ने क्या कदम उठाए?
पेटा इंडिया ने कलाकार को प्रिंट हटाने या आय दान करने की मांग की है।
चंचल की उम्र कितनी थी?
चंचल की उम्र लगभग 70 साल थी।
हाथियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है?
हाथियों का उपयोग मनोरंजन के लिए किया जाता है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।
मैकेनिकल एलिफेंट प्रोजेक्ट क्या है?
यह प्रोजेक्ट असली हाथियों की जगह मशीन से बने हाथियों का उपयोग करता है।
Nation Press