क्या माघ मेले में बसंत पंचमी और अचला सप्तमी स्नान पर्व पर 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आस्था की डुबकी लगाने का अनुमान है?

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क्या माघ मेले में बसंत पंचमी और अचला सप्तमी स्नान पर्व पर 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आस्था की डुबकी लगाने का अनुमान है?

सारांश

प्रयागराज में माघ मेले का चौथा स्नान पर्व बसंत पंचमी 23 जनवरी को है, जिसमें 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और रूट डाइवर्जन के लिए तैयारी कर ली है। जानें इस पर्व की महत्वता और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में।

Key Takeaways

  • बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को आयोजित होगा।
  • 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
  • प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की है।
  • यातायात सुगम बनाने के लिए ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।
  • नए यमुना पुल पर प्रतिबंध रहेगा।

प्रयागराज, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर आयोजित माघ मेले के चौथे स्नान पर्व बसंत पंचमी को सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए मेला प्रशासन की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। बसंत पंचमी और अचला सप्तमी की वजह से संगम में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और रूट डाइवर्जन की व्यवस्था लागू की है। बसंत पंचमी, अचला सप्तमी और सप्ताहांत के चलते 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान है।

संगम किनारे चल रहे माघ मेले का चौथा स्नान पर्व बसंत पंचमी 23 जनवरी को है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरुवार की रात 2.28 बजे से पंचमी तिथि आरंभ होगी जो अगले दिन 23 जनवरी को रात 1.56 तक रहेगी। इस पुण्यकाल में श्रद्धालु त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पीले अन्न और वस्त्र का दान कर सकते हैं। 25 जनवरी को अचला सप्तमी का पर्व है, जिसे पुत्र सप्तमी या भानु सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन अन्न भंडारे की परंपरा है। इस दौरान 24 जनवरी को सप्ताहांत होने की वजह से तीनों दिन माघ मेला क्षेत्र में भीड़ बनी रहेगी।

माघ मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है कि मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी में सबसे अधिक श्रद्धालुओं के संगम में पुण्य की डुबकी लगाने का अनुमान है। बसंत पंचमी से लेकर अचला सप्तमी तक 3.50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी के पावन जल में डुबकी लगा सकते हैं। मेला क्षेत्र में 3.5 किमी लंबाई में बनाए गए 24 घाट तैयार हैं। घाटों की सफाई, नदियों में निर्मल जल की उपलब्धता और अन्य सभी बुनियादी व्यवस्थाएँ पूरी कर ली गई हैं।

श्रद्धालुओं के बढ़ते दबाव के साथ, उन्हें सर्कुलेट करने के लिए पांटून पुलों की खास व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत परेड से झूसी जाने के लिए पांटून पुल संख्या 3, 5, और 7 का उपयोग किया जा सकता है, जबकि झूसी से परेड आने के लिए पांटून पुल संख्या 4 और 6 का उपयोग होगा। आपात स्थिति में पांटून पुल संख्या 1 और 2 में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।

बसंत पंचमी पर्व पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए मेला पुलिस ने ट्रैफिक प्लान जारी किया है। मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय का कहना है कि भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, घाट सुरक्षा और निकासी व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। माघ मेला से संबंधित वाहनों को छोड़कर भारी और हल्के वाहनों को प्रयागराज जिले की सीमा में प्रवेश से पहले ही दूसरे मार्गों पर मोड़ दिया जाएगा। इसके लिए रूट डाइवर्जन व्यवस्था लागू की जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बसंत पंचमी स्नान पर्व पर 23 जनवरी को नया यमुना पुल बंद रहेगा। पुराने पुल से ही आवागमन संभव होगा।

Point of View

जिसके लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे आयोजनों से धार्मिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में मदद मिलती है।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

बसंत पंचमी का महत्व क्या है?
बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु सरस्वती माता की आराधना करते हैं।
अचला सप्तमी कब मनाई जाती है?
अचला सप्तमी हर साल माघ मास की शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है, जो इस वर्ष 25 जनवरी को है।
माघ मेला में कितने श्रद्धालुओं का आना अपेक्षित है?
माघ मेला में इस वर्ष 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएँ की हैं?
प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और रूट डाइवर्जन की व्यवस्था लागू की है, साथ ही पांटून पुलों की व्यवस्था भी की गई है।
यातायात प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
यातायात प्रबंधन के लिए मेला पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है, जिसमें भीड़ नियंत्रण और निकासी व्यवस्था पर ध्यान दिया गया है।
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