15 अक्टूबर 2026
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एल. मुरुगन का केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा, राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वीकार किया; 2029 चुनाव के लिए तमिलनाडु में BJP मजबूत करेंगे

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एल. मुरुगन का केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा, राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वीकार किया; 2029 चुनाव के लिए तमिलनाडु में BJP मजबूत करेंगे

सारांश

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने सत्ता की सीट छोड़कर जमीन चुनी — 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के संकल्प के साथ। राष्ट्रपति मुर्मु ने 15 अक्टूबर को उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया। यह BJP की दक्षिण भारत रणनीति का अहम संकेत है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 15 अक्टूबर 2026 को अनुच्छेद 75(2) के तहत एल.
मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया।
मुरुगन सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय मामलों के राज्य मंत्री (MOS) पद पर कार्यरत थे।
मुरुगन ने राज्यसभा सदस्यता भी छोड़ने का अनुरोध किया ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में BJP को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सकें।
उन्होंने लगभग तीन दशकों तक ABVP और BJP में सेवा की; दिहाड़ी मजदूर परिवार की पृष्ठभूमि से आते हैं।
इस्तीफे के बाद उनके मंत्रालय के प्रभारों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया अपेक्षित है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 15 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति सचिवालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मुरुगन सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय मामलों के राज्य मंत्री (MOS) के पद पर कार्यरत थे।

इस्तीफे की वजह

मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में स्पष्ट किया कि वे मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता दोनों छोड़ना चाहते हैं। उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। उन्होंने अपने 'एक्स' अकाउंट पर साझा किए गए पत्र में लिखा, "अब मैं जमीनी स्तर पर लौटना चाहता हूँ, अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहता हूँ और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देना चाहता हूँ।"

मोदी की तमिलनाडु यात्रा से मिली प्रेरणा

मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया तमिलनाडु यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता से मिले अपार प्रेम और उत्साह ने उनके इस विश्वास को और पुख्ता किया है कि BJP इस राज्य में और बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है। उन्होंने कहा कि वे राज्य के हर गाँव और हर गली में जाकर लोगों से मिलना चाहते हैं और पार्टी की पहुँच बढ़ाना चाहते हैं।

तीन दशकों की राजनीतिक यात्रा

मुरुगन ने केंद्र सरकार में अपनी सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने अपनी जड़ों का स्मरण करते हुए बताया कि वे एक दिहाड़ी मजदूर परिवार में पले बढ़े हैं और उनके माता पिता पशु चराने का काम भी करते थे। उनके माता पिता आज भी कोनूर गाँव में सादा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि जमीनी कार्य का यह सिद्धांत ही वह मार्गदर्शक धुरी है जिसने लगभग तीन दशकों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और BJP में उनके राजनीतिक जीवन को दिशा दी।

तमिलनाडु में BJP की रणनीति

यह ऐसे समय में आया है जब BJP दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, जहाँ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की सत्ता मजबूत है। मुरुगन जैसे अनुभवी नेता का पूर्णकालिक रूप से राज्य में उतरना पार्टी की दक्षिण केंद्रित रणनीति को संकेत देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 'समावेशी विकास' के संदेश को हर नागरिक तक पहुँचाने और परिवारों को विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की इच्छा जताई।

आगे क्या

मुरुगन के इस्तीफे के बाद उनके मंत्रालय के प्रभारों का पुनर्वितरण अपेक्षित है। तमिलनाडु में उनकी सक्रियता 2029 के लोकसभा चुनावों तक BJP के संगठनात्मक विस्तार पर निर्णायक प्रभाव डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ पार्टी वर्षों की कोशिशों के बावजूद DMK के गढ़ में सेंध नहीं लगा पाई है। केंद्रीय पद का त्याग कर जमीनी कार्य का संकल्प दर्शाता है कि BJP 2029 को 'अभी से' लड़ना चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक नेता की पूर्णकालिक उपस्थिति उस संरचनात्मक कमज़ोरी को दूर कर सकती है जो तमिलनाडु में BJP की जड़ों की कमी से जुड़ी है। मुख्यधारा की कवरेज इस्तीफे की खबर तक सीमित रहती है, जबकि असली कहानी यह है कि BJP अब दक्षिण में 'सिंबल पॉलिटिक्स' से 'ग्राउंड पॉलिटिक्स' की ओर जानबूझकर पाला बदल रही है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
मुरुगन ने 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में BJP को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता दोनों छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राज्य भर में पार्टी की पहुँच बढ़ाना चाहते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने किस संवैधानिक प्रावधान के तहत इस्तीफा स्वीकार किया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर यह इस्तीफा स्वीकार किया। यह निर्णय 15 अक्टूबर 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
एल. मुरुगन कौन से मंत्रालय संभाल रहे थे?
एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा संसदीय मामलों के राज्य मंत्री (MOS) के पद पर कार्यरत थे। इस्तीफे के बाद इन प्रभारों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया अपेक्षित है।
तमिलनाडु में BJP की स्थिति क्या है?
तमिलनाडु में BJP को अभी भी DMK के मुकाबले कमज़ोर संगठनात्मक आधार का सामना करना पड़ रहा है। मुरुगन जैसे अनुभवी नेता का पूर्णकालिक रूप से राज्य में उतरना 2029 लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी की दक्षिण केंद्रित विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
एल. मुरुगन की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
मुरुगन ने लगभग तीन दशकों तक ABVP और BJP में काम किया है। वे एक दिहाड़ी मजदूर परिवार से आते हैं और उनके माता पिता कोनूर गाँव में सादा जीवन जीते हैं। केंद्र सरकार में अपनी सेवा को उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
राष्ट्र प्रेस
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