रामदास आठवले ने साझा किया, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी का दृष्टिकोण
सारांश
Key Takeaways
- रामदास आठवले ने पांच राज्यों में चुनाव लड़ने की योजना बनाई है।
- भाजपा का समर्थन करने का निर्णय लिया गया है।
- पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को हटाने का लक्ष्य रखा गया है।
- तमिलनाडु और केरल में भी चुनावों में भाग लेने की योजना है।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में किस तरह का रुख अपनाएगी। उन्होंने शनिवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में इस पर विस्तार से चर्चा की।
आठवले ने उल्लेख किया कि उनकी पार्टी ने इन पांच राज्यों में से तीन राज्यों में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जबकि अन्य दो राज्यों में भाजपा का समर्थन करने का फैसला लिया है।
उनके अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) तमिलनाडु में भी अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाएगी। इसके साथ ही, केरल में आरपीआई 10-12 सीटों पर चुनाव में भाग लेगी और असम में भी 10 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है। कुल मिलाकर, यह निर्णय लिया गया है और पश्चिम बंगाल में कितनी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा, इस पर भी अभी विचार चल रहा है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक विधानसभा सीटें हैं, इसलिए हम कोई भी निर्णय सोच-समझकर लेना चाहते हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य ममता बनर्जी को सत्ता से हटाना है और इस दिशा में हमारी पूरी तैयारी है। अगर परिस्थितियां स्पष्ट नहीं होती हैं, तो हम भाजपा को समर्थन देकर आगे बढ़ेंगे, ताकि वहां किसी को भी राजनीतिक संभावनाओं को मजबूत करने का मौका न मिले।
आठवले ने कहा कि असम और पुडुचेरी में वर्तमान में एनडीए की सरकार है और पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि स्थिति हमारे पक्ष में है। तमिलनाडु में भी भाजपा की सरकार बनने की पूरी संभावना है, जबकि केरल के बारे में कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, मैं यह कह सकता हूं कि पांच में से चार राज्यों में भाजपा की सरकार बनेगी, क्योंकि हमारी सरकार ने विकास के लिए लगातार प्रयास किया है। इससे लोगों में उत्साह का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल में भाजपा के पक्ष में माहौल बना हुआ है, खासकर हाल ही में हुए महानगरपालिका चुनावों के बाद।