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क्या कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन में भी प्रोजेक्ट हिमांक का मिशन जारी है?

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क्या कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन में भी प्रोजेक्ट हिमांक का मिशन जारी है?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन के बावजूद सीमा सड़क संगठन का प्रोजेक्ट हिमांक अपनी चुनौतियों से कैसे निपट रहा है? जानिए कैसे ये प्रयास भारतीय सेना की आवाजाही को निर्बाध बनाए रख रहे हैं।

मुख्य बातें

प्रोजेक्ट हिमांक भारतीय सेना की आवाजाही को निर्बाध बनाए रखता है।
बीआरओ ने 19,400 फीट की ऊंचाई पर नई सड़क का निर्माण किया है।
यह सड़क सैन्य और स्थानीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
सड़क निर्माण का जश्न तिरंगा फहराकर मनाया गया।
पर्यटन के लिए नए अवसर प्रदान करती है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कड़ाके की ठंड, अत्यधिक कम ऑक्सीजन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच भी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का प्रोजेक्ट हिमांक लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहा है, ताकि भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा से जुड़े जवानों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी है कि 18,300 फीट से अधिक ऊंचाई पर, बेहद कठिन परिस्थितियों में भी बीआरओ की टीमें रणनीतिक सड़कों को चालू रखने में जुटी हुई हैं, ताकि अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों तक हर मौसम में संपर्क बना रहे।

मंत्रालय ने इस समर्पण को 'सेवा से ऊपर कुछ नहीं' की भावना का प्रतीक बताया है। इसके अनुसार, विपरीत परिस्थितियों में गढ़ा गया यह संकल्प ही प्रोजेक्ट हिमांक की असली पहचान है।

गौरतलब है कि 5 अक्टूबर को बीआरओ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। प्रोजेक्ट हिमांक के तहत पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास मिग ला दर्रे पर 19,400 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क का निर्माण कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। इस उपलब्धि के साथ बीआरओ ने वर्ष 2021 में उमलिंग ला (19,024 फीट) पर बनाए गए अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

इस ऐतिहासिक कार्य का नेतृत्व ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने किया। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद बीआरओ की टीम ने मौके पर तिरंगा और संगठन का ध्वज फहराकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

नई सड़क लिकरू-मिग ला-फुकचे एलाइनमेंट का हिस्सा है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह हानले से लेकर सीमा के पास स्थित फुकचे गांव तक जाने वाला तीसरा महत्वपूर्ण मार्ग बनाती है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सैन्य आवाजाही और रसद आपूर्ति को बड़ी मजबूती मिलेगी।

केवल रणनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, यह सड़क लद्दाख में पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद जगाती है। यहां से दिखने वाला सिंधु घाटी का मनोरम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।

वर्ष 1985 में शुरू किया गया प्रोजेक्ट हिमांक, बीआरओ की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो लद्दाख जैसे कठिन और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और रखरखाव का कार्य करता है। उमलिंग ला और मिग ला जैसी सड़कें न केवल देश की सामरिक ताकत को मजबूत करती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल भारतीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है बल्कि स्थानीय समुदाय के विकास में भी योगदान देता है। यह अभियान कठिनाइयों का सामना करते हुए भारतीय सेना की तत्परता को दर्शाता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोजेक्ट हिमांक क्या है?
प्रोजेक्ट हिमांक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा लद्दाख में कठिन और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
बीआरओ ने कितनी ऊंचाई पर सड़क का निर्माण किया है?
बीआरओ ने 19,400 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क का निर्माण किया है।
इस सड़क का क्या महत्व है?
यह सड़क सीमावर्ती इलाकों में सैन्य आवाजाही और रसद आपूर्ति को मजबूती प्रदान करती है।
प्रोजेक्ट हिमांक का लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय सैनिकों की आवाजाही को सुनिश्चित करना है।
क्या यह सड़क पर्यटन को प्रभावित करेगी?
हां, यह सड़क लद्दाख में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद जगाती है।
राष्ट्र प्रेस
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