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क्या 'वोट चोरी' विवाद पर पूर्व सीजेआई गवई का कहना है कि कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का माध्यम नहीं बनाना चाहिए?

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क्या 'वोट चोरी' विवाद पर पूर्व सीजेआई गवई का कहना है कि कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का माध्यम नहीं बनाना चाहिए?

सारांश

पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अदालतों में विवाद नहीं, बल्कि जनसमक्ष हल होना चाहिए। राहुल गांधी के 'वोट चोरी' आरोपों पर गवई की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है। जानें पूरी कहानी यहाँ।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए।
न्यायपालिका का उपयोग राजनीतिक लड़ाइयों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी के आरोपों पर गवई की टिप्पणी महत्वपूर्ण है।
जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
जनहित में विवादों का समाधान जनसमक्ष होना चाहिए।

नई दिल्ली, 27 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने आज कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई के लिए एक मंच के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी तब आई जब अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा उठाए गए 'वोट चोरी' के आरोपों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से जांच की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

अक्टूबर में, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया था और याचिकाकर्ता को सही समाधान के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करने की सलाह दी थी।

राष्ट्र प्रेस के साथ विशेष बातचीत में पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। न्यायपालिका का उपयोग राजनीतिक लड़ाई के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ये संघर्ष मतदाता के सामने हल किए जाने चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा कि न्यायिक मंचों को राजनीतिक विवादों के समाधान का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।

उन्होंने बताया, "कई मामलों में नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि न तो केंद्र और न ही राज्य की जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्य के लिए दुरुपयोग होना चाहिए।"

पूर्व न्यायाधीश गवई ने आगे कहा, "दो मामलों में मैंने यह स्पष्ट किया था कि जांच मशीनरी का इस्तेमाल मनमुटाव सुलझाने के लिए नहीं होना चाहिए। मैंने राहत दी, क्योंकि राजनीतिक विवादों का समाधान अदालतों में नहीं, बल्कि लोगों के सामने होना चाहिए।"

इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बार-बार भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है और हरियाणा तथा कर्नाटक में इस मुद्दे को उठाया है। कांग्रेस ने इन आरोपों के संदर्भ में दिल्ली और बिहार में पब्लिक रैलियां भी की हैं। इसके जवाब में 272 जाने-माने नागरिकों (जिनमें रिटायर्ड जज, ब्यूरोक्रेट और मिलिट्री अधिकारी शामिल थे) ने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों की निंदा करते हुए एक ओपन लेटर जारी किया था।

बीआर गवई, जो भारत के 52वें चीफ जस्टिस रहे हैं, का करियर बहुत लंबा और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 1985 में वकालत शुरू की थी, लेकिन वे कानून के राज में गहरी रुचि रखते थे। अपने करियर में वकील, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज, सुप्रीम कोर्ट के जज और अंततः सीजेआई के रूप में उन्होंने न्यायिक कुशलता और कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

राष्ट्र प्रेस

वीकेयू/वीसी

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि राजनीतिक दबाव के तहत। गवई का यह बयान राजनीतिक लड़ाई को न्यायिक क्षेत्र से बाहर रखने की आवश्यकता को दर्शाता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व सीजेआई गवई ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं बनाना चाहिए।
'वोट चोरी' विवाद का क्या महत्व है?
'वोट चोरी' के आरोप भारतीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा हैं, जो लोकतंत्र की नींव को प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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