क्या शंकराचार्य का अपमान करने की साजिश चल रही है? रणदीप सुरजेवाला का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- शंकराचार्य का अपमान हिन्दू संस्कृति का अपमान है।
- सरकार पर धर्मगुरु का सम्मान न करने का आरोप।
- भ्रष्टाचार के कारण आम नागरिकों की जान जा रही है।
- सत्ता का अहंकार लोकतंत्र के लिए खतरा है।
- संस्कृति और परंपरा का महत्व समझना आवश्यक है।
कुरुक्षेत्र, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कुरुक्षेत्र में आयोजित पार्टी के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। इसके पश्चात उन्होंने माघ मेले में शंकराचार्य के विवाद और नोएडा में हुए इंजीनियर की मौत के मुद्दे पर भाजपा पर प्रहार किया।
प्रयागराज में शंकराचार्य के मामले में सुरजेवाला ने कहा कि हिन्दू सभ्यता और संस्कृति में शंकराचार्य का एक विशेष स्थान है और उन्हें गुरु का दर्जा दिया गया है। शंकराचार्य का अपमान करने का एक षड्यंत्र चल रहा है। यदि कोई गलती होती है, तो उसे स्वीकार कर मामले को समाप्त करना चाहिए, लेकिन इस मामले में चोरी और सीनाजोरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार सबसे बड़े धर्म के सिद्ध शंकराचार्य का अपमान करती है और गर्व से इस बात का प्रदर्शन करती है कि वह उनका अपमान कर सकती है।
सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि क्या गंगा-जमुनी तहजीब की हिन्दू संस्कृति की यह रीति और नीति हो सकती है? क्या यह धर्म और संस्कृति का यह मार्ग हो सकता है? आज सत्ता में बैठे लोग अहंकारी और मठाधीश बन गए हैं, जो न तो धर्मगुरु का सम्मान करते हैं, न ही संस्कार और संस्कृति को समझते हैं।
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह वाराणसी के घाटों और पवित्र मूर्तियों को ध्वस्त किया गया, दिल्ली में भी मंदिर गिराया गया और हमारी सनातन धरोहरों पर हमले किए जा रहे हैं, यह अत्यंत निंदनीय है।
सुरजेवाला ने कहा कि पहले भाजपा के केवल 2 सांसद थे, तब क्या राजीव गांधी ने उनका उपहास उड़ाया था? कांग्रेस के पास तो 100 से अधिक सांसद हैं और राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। भाजपा के सिर पर सत्ता का अहंकार चढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में इंजीनियर की मौत पर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस पर बयान दिया है कि बच्चे खांसी पीकर मर रहे हैं, जहरीला पानी पीकर लोग मर रहे हैं, और नोएडा में इंजीनियर की जान चली गई। गुजरात में पुल गिर गया, और एयरपोर्ट भी गिर रहा है। विकास के नाम पर भयमुक्त भ्रष्टाचार हो रहा है और आम नागरिकों की जान जा रही है। किसी को सजा देने की बजाय दोषियों को बचाया जा रहा है।