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क्या सज्जन कुमार को बरी करना न्याय व्यवस्था के लिए चिंताजनक है?

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क्या सज्जन कुमार को बरी करना न्याय व्यवस्था के लिए चिंताजनक है?

सारांश

क्या सज्जन कुमार को बरी करना न्याय व्यवस्था के लिए चिंताजनक है? भाजपा नेता तरुण चुघ ने 1984 के दंगों में न्याय की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है। जानें क्या कहा उन्होंने!

मुख्य बातें

41 साल बाद भी न्याय की कमी सज्जन कुमार का बरी होना राजनीतिक संरक्षण की समस्या घुसपैठियों की पहचान का महत्व सामाजिक संतुलन की आवश्यकता

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस निर्णय को अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताया।

तरुण चुघ ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि 41 वर्षचिंताजनक है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "जो लोग सिखों के खिलाफ दंगे करते हैं और निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं, उन्हें किसी भी हाल में सजा से नहीं बचने दिया जाएगा। पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं और इस प्रकार के फैसले उनके घावों को फिर से हरा कर देते हैं।"

उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसे लोगों को बचाने की कोशिश की है, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं।

तरुण चुघ ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कांग्रेस बार-बार ऐसे 'जालिमों' को संरक्षण देने का प्रयास करती रही है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

वहीं, दूसरी ओर, तरुण चुघ ने राजस्थान सरकार के एक फैसले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राज्य सरकार के 'जनसांख्यिकीय असंतुलन' से संबंधित निर्णय का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि देश की जनसंख्या संरचना को संतुलित रखना एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। घुसपैठियों की पहचान की जानी चाहिए, उन्हें हटाया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर देश से बाहर भेजा जाना चाहिए।

तरुण चुघ ने यह भी कहा कि अवैध रूप से देश में रहने वाले लोग देश के गरीब नागरिकों के अधिकारों का हनन करते हैं। उनके अनुसार, सरकार का यह कदम आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है और इससे देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन दोनों मजबूत होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि महत्वपूर्ण मामलों में दोषियों को बरी किया जाता है, तो यह न केवल पीड़ितों के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा खतरा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय की व्यवस्था में किसी भी प्रकार का सामंजस्य न हो।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सज्जन कुमार को बरी करने का फैसला सही है?
यह फैसला कई लोगों के लिए निराशाजनक है, खासकर उन पीड़ितों के लिए जिन्होंने न्याय की उम्मीद की थी।
तरुण चुघ ने इस फैसले पर क्या कहा?
तरुण चुघ ने इसे दुखद और पीड़ादायक बताया और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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