सिंधिया ने अशोकनगर में कहा: आदिवासी समुदाय देश की प्रकृति और संस्कृति का सच्चा संरक्षक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के करिला धाम में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय भारत की प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं का सच्चा संरक्षक है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश की समग्र प्रगति के लिए इस समुदाय के कल्याण और विकास में उनकी समान भागीदारी अपरिहार्य है।
मुख्य संबोधन और केंद्रीय संदेश
सिंधिया ने सम्मेलन में कहा, 'आदिवासी समुदाय हमारी प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं का सच्चा संरक्षक है। इस समुदाय का सम्मान करना, उनके कल्याण को सुनिश्चित करना और विकास के लिए उन्हें समान अवसर प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।' उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव के ज़रिए पीढ़ियों से देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है।
पीएम-जनमन योजना पर ज़ोर
केंद्र सरकार की आदिवासी कल्याण पहलों का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने 'प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान' (पीएम-जनमन) को विशेष रूप से रेखांकित किया। इस योजना का उद्देश्य 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों' (पीवीटीजी) के जीवन स्तर में सुधार लाना है, जिसके तहत आवास, सड़क संपर्क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कल्याणकारी योजनाएँ तभी अपने लक्ष्य पूरे कर सकती हैं, जब उनका लाभ पात्र परिवारों तक समय पर पहुँचे। सिंधिया ने जन प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे आदिवासी समुदायों के बीच सरकारी योजनाओं की जागरूकता फैलाएँ और लाभार्थियों को उपलब्ध सहायता दिलाने में मदद करें।
राष्ट्रपति मुर्मु का उदाहरण और लोकतांत्रिक अवसर
सिंधिया ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के चुनाव का हवाला देते हुए इसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में मौजूद समान अवसरों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी समुदाय से आने वाली महिला का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि समाज के हर वर्ग के लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुले हैं।
करिला धाम विकास और सड़क परियोजना की घोषणाएँ
अपने गुना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान सिंधिया ने घोषणा की कि प्रमुख धार्मिक केंद्र करिला धाम को 'करिला धाम लोक' के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले और इसकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।
उन्होंने बताया कि शाढोरा को करिला धाम से जोड़ने वाली लगभग 50 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए ₹100 करोड़ की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है और निर्माण कार्य जारी है। यह परियोजना अशोकनगर, चंदेरी और मुंगावली से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन सुगम बनाएगी।
सामुदायिक अवसंरचना और कार्यक्रम की झलक
सिंधिया ने स्थानीय विधायक की विकास निधि से ₹50 लाख की लागत से शबरी आश्रम में एक सामुदायिक भवन और एक टिन शेड के निर्माण की भी घोषणा की। सम्मेलन से पहले उन्होंने करिला धाम में पूजा-अर्चना की; आदिवासी समुदाय के सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया और कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के बीच पौष्टिक भोजन भी वितरित किया गया। यह आयोजन राजनीतिक संवाद और सामुदायिक जुड़ाव का मिश्रित मंच बना, जो भविष्य में आदिवासी कल्याण नीतियों के क्रियान्वयन की दिशा तय करेगा।