कंचनजंगा: सिक्किम के 51वें राज्य वर्ष पर PM मोदी ने साझा किया सिंधिया का विशेष लेख
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 24 मई 2026 को सिक्किम के राज्यत्व के 51वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा लिखित एक विशेष लेख एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। इस लेख में कंचनजंगा को सिक्किम की भूमि, स्मृति और चेतना का रक्षक बताया गया है। प्रधानमंत्री ने इस लेख को सिक्किम की सांस्कृतिक और विकासात्मक यात्रा का सशक्त दस्तावेज़ बताया।
कंचनजंगा: पाँच खजानों की पौराणिक परंपरा
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने लेख में लिखा कि कंचनजंगा, जिसे 'पर्वत श्रृंखला' कहा जाता है, सदियों से सिक्किम के स्थानीय समुदायों की लोककथाओं में एक पवित्र सभ्यतागत शक्ति के रूप में विद्यमान रहा है। सिक्किम की लगभग एक चौथाई भूमि कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है। महान लामा ल्हात्सुन चेनपो ने पाँचों चोटियों को शाश्वत बर्फ के पाँच खजाने कहा है — सोना, चाँदी, रत्न, अनाज और पवित्र ग्रंथ।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'जैसे ही सिक्किम अपने राज्य के दर्जे के 51वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कंचनजंगा के बारे में लिखा है, और इसकी प्रशंसा करते हुए इसे सिक्किम की भूमि, उसकी स्मृतियों और उसकी चेतना का रक्षक बताया है। उन्होंने इस बात की जानकारी दी है कि कंचनजंगा के पाँच रत्न राज्य की यात्रा को लगातार उज्ज्वल बना रहे हैं, और 'विकसित सिक्किम 2047' की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।'
सामाजिक सद्भाव और प्राकृतिक विरासत
सिंधिया ने लिखा कि पहला खजाना — सोना — सिक्किम के लोगों में निहित है। उन्होंने कहा, 'विकास तभी स्थायी होता है जब वह समुदायों के विश्वास से पनपता है, और सिक्किम लेपचा, भूटिया और नेपाली समुदायों की एकता और सामाजिक सद्भाव में इस सत्य का ठोस प्रमाण प्रस्तुत करता है।' दूसरा खजाना — चाँदी — राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता में झलकता है, जहाँ तीस्ता और रंगीत नदियाँ घने जंगलों के बीच से बहती हैं।
आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक धरोहर
तीसरा खजाना सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सभ्यतागत रत्नों का है। मंत्री ने रावांगला के बुद्ध पार्क, भलेधुंगा स्काईवॉक और गुरु पद्मसंभव द्वारा आशीर्वादित पवित्र स्थलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, सिक्किम आज की अशांत दुनिया में आध्यात्मिकता की एक अमूल्य भावना को संरक्षित रखता है, जो आधुनिक आकांक्षाओं के साथ सह-अस्तित्व में है।
जैविक खेती और शिक्षा: विकास के नए आयाम
चौथे खजाने — अनाज — के संदर्भ में सिंधिया ने सिक्किम के 100 प्रतिशत जैविक राज्य बनने की उपलब्धि को समकालीन भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण विकासात्मक सफलताओं में से एक बताया। इलायची की खेती और सतत कृषि में राज्य की सफलता पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र की संभावनाओं को रेखांकित करती है। पाँचवाँ खजाना — पवित्र ग्रंथ — शिक्षा में प्रतिबिंबित होता है, जहाँ नामची में सिक्किम राज्य विश्वविद्यालय के नए शिक्षण संस्थान और स्थायी परिसर 'विकसित भारत' के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिभाओं के पोषण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
गौरतलब है कि सिंधिया ने यह लेख सिक्किम के 51वें राज्य स्थापना दिवस समारोह के लिए की गई अपनी हालिया यात्रा के अनुभवों के आधार पर लिखा है। 'विकसित सिक्किम 2047' का यह विज़न राज्य की परंपरा और आधुनिकता के समन्वय की दिशा में एक सुविचारित प्रयास प्रतीत होता है।