शांतिपुर से पूर्व भाजपा विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने स्वतंत्र चुनाव लड़ने का लिया निर्णय, दीवारों पर समर्थन अभियान तेज
सारांश
Key Takeaways
- अरिंदम भट्टाचार्य ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
- दीवार लेखन अभियान स्थानीय लोगों का समर्थन दर्शाता है।
- भट्टाचार्य का 'आत्मनिर्भरता' का सिद्धांत महत्वपूर्ण है।
- शांतिपुर में उनका समर्थन एक नया राजनीतिक समीकरण बना सकता है।
- अतीत में उनकी मेहनत को स्थानीय लोग याद कर रहे हैं।
नदिया, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के शांतिपुर से पूर्व भाजपा विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने इस बार पार्टी टिकट न मिलने पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। शांतिपुर की दीवारों पर उनके समर्थन में बिना किसी चुनावी चिह्न के लिखाई का अभियान तेजी से चल रहा है, जो काफी चर्चित हो गया है।
अरिंदम भट्टाचार्य ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा, "जिन लोगों ने दीवारों पर लिखने का कार्य किया है, वे मेरे छोटे भाइयों की तरह हैं। मैं उनमें से प्रत्येक को जानता हूं और यह कार्य अभी भी जारी है। मैं उनसे कह सकता था कि ऐसा न करें, लेकिन मैं उन्हें प्रोत्साहित भी कर सकता हूं। लोगों के दिलों में एक विशेष उम्मीद थी जो पूरी नहीं हुई, इसी कारण यह अभियान चल रहा है। इसमें केवल एक-दो लोग नहीं, बल्कि हजारों लोग शामिल हैं।"
भट्टाचार्य ने कहा कि वे 'आत्मनिर्भरता' के सिद्धांत के समर्थक हैं, जिसे उन्होंने 2021 में भाजपा में शामिल होते समय प्रस्तुत किया था। उन्होंने आगे कहा, "अब जब सभी अपने समर्थन को प्रकट कर रहे हैं, तो मेरा इरादा उनसे सीधे पूछने का है। यदि वे पुष्टि करते हैं कि सच में ‘आत्मनिर्भरता’ की आवश्यकता है, तो मैं चुनाव लड़ने के लिए आगे बढ़ूंगा।"
पूर्व विधायक ने रानाघाट लोकसभा क्षेत्र के सांसद जगन्नाथ सरकार पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, "2021 में शांतिपुर में भाजपा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए मैंने बहुत मेहनत की थी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उस व्यक्ति ने डींग मारी कि ‘मैं हीरो बन गया हूं, मैंने ही जीत हासिल की है’। उन्होंने आम जनता के वोटों की तो बात ही छोड़ दीजिए, उन्होंने उन पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निराश किया जिन्होंने सत्ताधारी पार्टी का विरोध करके उनकी जीत सुनिश्चित की थी।"
अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा, "मैं अतीत में भी शांतिपुर की जनता के साथ खड़ा रहा हूं और आज भी उनके साथ खड़ा हूं।"
शांतिपुर में दीवार लेखन का यह अभियान बिना किसी चुनावी चिह्न के चल रहा है, जो स्थानीय स्तर पर बहुत चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अरिंदम भट्टाचार्य शांतिपुर में बहुत लोकप्रिय रहे हैं और उनकी स्वतंत्र उम्मीदवारी से क्षेत्र की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।