श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का बयान: चीन-श्रीलंका संबंधों में आपसी सम्मान की भूमिका

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श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का बयान: चीन-श्रीलंका संबंधों में आपसी सम्मान की भूमिका

सारांश

श्रीलंकाई प्रधानमंत्री हरिनी अमरासुरिया ने कहा है कि चीन-श्रीलंका संबंध आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित होंगे, जिससे द्विपक्षीय सहयोग में वृद्धि होगी। उनकी चीन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए, उन्होंने सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में उम्मीदें जताई।

Key Takeaways

  • श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का विश्वास है कि चीन-श्रीलंका संबंध आपसी सम्मान पर आधारित होंगे।
  • उन्होंने चीन की उपलब्धियों की सराहना की।
  • बेल्ट एंड रोड पहल में सक्रिय भागीदारी से विकास की उम्मीद।
  • पर्यटन के क्षेत्र में चीनी पर्यटकों के स्वागत की इच्छा।
  • शांतिपूर्ण समाधान के लिए विभिन्न देशों के नेताओं की प्रतिबद्धता की आवश्यकता।

बीजिंग, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरासुरिया ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के साथ एक विशेष साक्षात्कार में व्यक्त किया कि उन्हें पूरा भरोसा है कि चीन-श्रीलंका संबंध आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित होकर द्विपक्षीय सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा, जिससे दोनों देशों को लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री अमरासुरिया ने अपनी हालिया चीन यात्रा के दौरान पेइचिंग में फॉरबिडन सिटी और ग्रेट वॉल जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास संग्रहालय का भी दौरा किया। उन्होंने कहा, “चीन की उपलब्धियों को देखकर ऐसा लगता है मानो यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। आज चीन की वैश्विक स्थिति केवल उत्पादन और निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नवाचार और प्रगति के प्रति भी प्रतिबद्ध है। वैश्विक मंच पर चीन लगभग हर क्षेत्र में खोज और नेतृत्व करता दिखाई देता है।”

राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बारे में बात करते हुए अमरासुरिया ने कहा कि वह एक अत्यंत करिश्माई नेता हैं और उनसे मिलना तथा विचारों का आदान-प्रदान करना उनके लिए एक गर्व की बात थी। उन्होंने “मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय” की अवधारणा का समर्थन करते हुए कहा, “हमें मिलकर काम करना चाहिए और अलगाववादी सोच को त्याग देना चाहिए।” उनका मानना है कि मौजूदा अशांत वैश्विक माहौल में विभिन्न देशों के नेताओं को शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए, क्योंकि एक देश के कदमों का प्रभाव अन्य देशों और समाजों पर भी पड़ता है।

अमरासुरिया ने चीन-श्रीलंका संबंधों के भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि दोनों देशों के विचार और दृष्टिकोण में काफी समानता है। उनका मानना है कि यह संबंध एक मजबूत और स्थिर द्विपक्षीय साझेदारी का उदाहरण बनेगा। उन्होंने हरित ऊर्जा, शिक्षा के आधुनिकीकरण, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद जताई। बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने वाले शुरुआती देशों में से एक होने के नाते श्रीलंका इस साझा विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी जारी रखेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि श्रीलंका एक द्वीप राष्ट्र है, फिर भी यहां समृद्ध और विविध पर्यटन संसाधन मौजूद हैं और लोग बेहद गर्मजोशी से अतिथियों का स्वागत करते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक चीनी पर्यटकों के श्रीलंका आने की आशा जताई। उनका विश्वास है कि पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ेगा, जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिलेगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Point of View

श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का यह बयान चीन-श्रीलंका संबंधों की स्थिरता और भविष्य की संभावनाओं को उजागर करता है। यह द्विपक्षीय सहयोग के विकास में महत्वपूर्ण संकेतक है, जो वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

चीन-श्रीलंका संबंधों में क्या मुख्य बातें शामिल हैं?
इन संबंधों में आपसी सम्मान, विश्वास और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग जैसे हरित ऊर्जा, शिक्षा, और पर्यटन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री अमरासुरिया ने चीन यात्रा के दौरान क्या देखा?
उन्होंने फॉरबिडन सिटी, ग्रेट वॉल और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास संग्रहालय का दौरा किया।
श्रीलंका में पर्यटन के अवसर क्या हैं?
श्रीलंका में समृद्ध और विविध पर्यटन संसाधन हैं और लोग गर्मजोशी से अतिथियों का स्वागत करते हैं।
बेल्ट एंड रोड पहल का श्रीलंका पर क्या प्रभाव है?
श्रीलंका इस पहल में शामिल होकर साझा विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।
चीन-श्रीलंका संबंधों का भविष्य कैसा है?
इन संबंधों में विचार और दृष्टिकोण में समानता है, जिससे द्विपक्षीय साझेदारी मजबूत होगी।
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