सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स के 48 साल के सफर को किया याद, 'कालीचरण' से 'ताल' तक दिग्गजों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
फिल्ममेकर सुभाष घई ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को अपने प्रोडक्शन हाउस मुक्ता आर्ट्स लिमिटेड के 48वें स्थापना वर्ष के अवसर पर एक भावुक पोस्ट के ज़रिए अपने पाँच दशक के फ़िल्मी सफर को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने मेंटर दिलीप कुमार, दिग्गज निर्माता एनएन सिप्पी और निर्देशक यश चोपड़ा को विशेष श्रद्धांजलि दी।
इंस्टाग्राम पोस्ट से खोला दिल
सुभाष घई ने इंस्टाग्राम पर मुक्ता आर्ट्स की सिल्वर जुबली का एक वीडियो साझा किया, जिसमें दिलीप कुमार, यश चोपड़ा, एनएन सिप्पी और सुशील कुमार शिंदे समेत कई दिग्गज हस्तियाँ नज़र आईं। इस पोस्ट में उन्होंने निर्माता प्रवेश सिप्पी का विशेष आभार व्यक्त किया।
कैसे मिली पहली फ़िल्म
सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'प्रवेश सिप्पी, आपका शुक्रिया। आप मेरी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म 'कालीचरण' के पहले प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी के प्यारे बेटे हैं।' उन्होंने बताया कि जब वे एक नवोदित निर्देशक के रूप में संघर्ष कर रहे थे और उनकी स्क्रिप्ट हर जगह से ठुकराई जा रही थी, तब प्रवेश सिप्पी ने उनकी निर्देशन शैली से प्रभावित होकर अपने पिता एनएन सिप्पी को उनका नाम सुझाया था। इसी भरोसे की बदौलत सुभाष घई को 1976 में उनकी पहली ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'कालीचरण' मिली।
एनएन सिप्पी ने 1975 में सुभाष घई को प्रोडक्शन की बारीकियाँ सिखाईं, और 1978 में मुक्ता फिल्म प्रोडक्शंस की नींव रखी गई। यह वही आधार था जिस पर आगे चलकर हिंदी सिनेमा की कुछ सबसे यादगार फ़िल्में बनीं।
48 साल का शानदार फ़िल्मी सफर
सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स के बैनर तले 'कर्ज', 'हीरो', 'कर्मा', 'मेरी जंग', 'राम लखन', 'सौदागर', 'खलनायक', 'परदेस', 'ताल', 'यादें', 'युवराज', 'ब्लैक एंड व्हाइट', 'ऐतराज' और 'इकबाल' समेत अनेक चर्चित फ़िल्में बनाईं। यह सफर भारतीय मनोरंजन उद्योग के कई दशकों का जीवंत दस्तावेज़ है।
आज का मुक्ता आर्ट्स
सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज मुक्ता आर्ट्स लिमिटेड, व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल और मुक्ता ए2 सिनेमाज के साथ मिलकर कंटेंट क्रिएशन और व्यावसायिक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एसजीएम एनिमेशन स्टूडियोज के माध्यम से नए टैलेंट को अवसर देते हुए कई नए कंटेंट फॉर्मेट भी लॉन्च किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि सुभाष घई आज केवल एक फिल्ममेकर नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के फ़िल्मकारों को तैयार करने वाले एक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुके हैं — ठीक वैसे ही जैसे कभी दिलीप कुमार और एनएन सिप्पी ने उन्हें राह दिखाई थी।