क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण को जवाब दिया है?

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क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण को जवाब दिया है?

सारांश

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला प्राधिकरण के खिलाफ एक विस्तृत जवाब पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि यह नोटिस उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। क्या यह मामला धार्मिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करेगा?

मुख्य बातें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण के आरोपों का खंडन किया।
नोटिस को वापस लेने की मांग की गई है।
भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
धार्मिक मान्यता और प्रतिष्ठा का सवाल है।

प्रयागराज, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस का उत्तर देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आठ पन्नों का एक प्रतिवाद प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से भेजे गए इस जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों का खंडन किया है और नोटिस को वापस लेने की अपील की है। इसके साथ ही, उन्होंने मनमाना और भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील ने 15 बिंदुओं में मेला प्राधिकरण को जवाब दिया है। उन्होंने उल्लेख किया है, "सोमवार को आपकी (मेला प्राधिकरण) ओर से जारी नोटिस, सम्मानित अविमुक्तेश्वरानंद को बदनाम और अपमानित करने के बुरे इरादे से जारी किया गया है, जो कि मनमाना, द्वेषपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।"

शारदामठ द्वारका के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की वसीयत का भी उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर वकील ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शंकराचार्य होने की वैधता पर उठाए गए सवालों का उत्तर दिया।

उन्होंने अपने उत्तर में लिखा, "एक जुलाई 2021 को एक घोषणा पत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ का जगद्गुरु शंकराचार्य नियुक्त किया गया। 12 अक्टूबर 2022 को ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य की वसीयत और घोषणा का पालन करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को श्री सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी द्वारा ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से नियुक्त किया गया। यह सब लाखों लोगों की उपस्थिति में परमहांसी गंगा आश्रम में हुआ।"

उन्होंने आगे लिखा, "ये झूठे आरोप फैलाए जा रहे हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद को जगतगुरु शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग करने का अधिकार नहीं है, जिससे अधिकारियों और आम जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद की ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति की वैधता के बारे में भ्रम उत्पन्न हो गया है। मेला प्राधिकरण के नोटिस के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंभीर वित्तीय, सामाजिक और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान हुआ है, जिसके कारण उनकी गरिमा और सम्मान पर असर पड़ा है।"

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अनुरोध किया है कि सोमवार को जारी नोटिस को वापस लिया जाए। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि जगद्गुरु शंकराचार्य संस्थान और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बदनाम करने के लिए जिम्मेदार सभी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि धार्मिक संस्थाएं और उनके नेता किस तरह से समाज में अपनी पहचान बनाए रखते हैं। ऐसे मामलों में न्याय का होना अनिवार्य है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कौन हैं?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य हैं।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने क्यों नोटिस जारी किया?
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी पर आरोप लगाए थे, जिसके जवाब में उन्होंने अपना प्रतिवाद प्रस्तुत किया।
स्वामी ने नोटिस को वापस लेने की मांग क्यों की?
स्वामी ने आरोपों को झूठा बताया और अपने सम्मान की रक्षा के लिए नोटिस वापस लेने की मांग की।
राष्ट्र प्रेस
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