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क्या जेएनयू में विवादित नारे को लेकर तेज प्रताप का बयान महत्वपूर्ण है?

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क्या जेएनयू में विवादित नारे को लेकर तेज प्रताप का बयान महत्वपूर्ण है?

सारांश

क्या जेएनयू में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारे लगाने की घटना से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है? तेज प्रताप यादव ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है? जानिए इस विवाद के पीछे की कहानी और तेज प्रताप का दृष्टिकोण।

मुख्य बातें

प्रधान मंत्री पद की गरिमा का सम्मान आवश्यक है।
राजनीति में युवा छात्रों की आवाज़ का महत्व।
नारे लगाने की घटनाएं राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
धार्मिक सहिष्णुता का पालन करना चाहिए।
नेपाल के मामलों में हमें संयम से काम लेना चाहिए।

पटना, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने ऐसे नारों की कड़ी निंदा की। उन्होंने नारे लगाने वालों को नासमझ बताया और प्रधान मंत्री पद की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

तेज प्रताप यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ जो प्रदर्शन कर रहे हैं, वे लोग नासमझ हैं। उन्हें समझ नहीं है। प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस पद की अपनी एक गरिमा है। इसी कारण उनके लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।"

तेज प्रताप यादव ने कहा, "ऐसे छात्र, जो नासमझ हैं और जेएनयू का हवाला दे रहे हैं और ऐसी निम्न स्तर की भाषा शैली का प्रयोग कर रहे हैं, वो गलत हैं। ऐसी भाषा शैली का प्रयोग नहीं करना चाहिए। युवा और नौजवान देश के भविष्य होते हैं। इस मामले में जो कार्रवाई चल रही है, उसे सरकार देख रही है।"

दरअसल, सोमवार को जेएनयू परिसर में कई लेफ्ट-विंग छात्र संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में नारे लगाए थे। यह कार्यक्रम जनवरी 2020 में हुए उस हमले की छठी बरसी पर रखा गया था, जिसमें नकाबपोश लोगों ने जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था।

तेज प्रताप पड़ोसी देश नेपाल में हुए हालिया विवाद पर बयान देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा, "यह नेपाल का मामला है, जिसे नेपाल की सरकार देखेगी। इस मामले में मैं कुछ नहीं बोल सकता।"

वह भाजपा नेता नवनीत राणा और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले हालिया बयान से भी किनारा करते नजर आए।

तेज प्रताप ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा के साथ तोड़-फोड़ करने की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, "जिसने भी ऐसा काम किया है, उसके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी धर्म के साथ छेड़-छाड़ नहीं करनी चाहिए, चाहे हिंदू हो या मुसलमान।"

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है। हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि हम युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन कर सकें।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में विवादित नारे क्यों लगाए गए?
यह नारे जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में लगाए गए थे, विशेषकर जनवरी 2020 में हुए हमले की छठी बरसी पर।
तेज प्रताप यादव का इस पर क्या कहना है?
तेज प्रताप यादव ने नारों की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए और प्रधानमंत्री पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
क्या तेज प्रताप ने नेपाल विवाद पर कुछ कहा?
तेज प्रताप ने नेपाल के हालिया विवाद पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह नेपाल का मामला है और उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना।
क्या तेज प्रताप ने बांग्लादेश में हुई घटनाओं पर कुछ कहा?
हां, तेज प्रताप ने बांग्लादेश में धार्मिक प्रतिमाओं के साथ तोड़-फोड़ की घटना की कड़ी निंदा की और सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्या यह घटना राजनीति में कोई बदलाव ला सकती है?
यह घटनाएं निश्चित रूप से राजनीतिक माहौल में गर्माहट लाने का काम करेंगी और युवा छात्रों की आवाज़ को फिर से उभारेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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