अलास्का LNG पाइपलाइन: दक्षिण कोरिया ने मंजूरी नहीं दी तो ट्रंप बोले — 'कीमत दोगुनी करूंगा'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दक्षिण कोरिया को कड़ी चेतावनी दी कि अगर सोल ने अलास्का LNG पाइपलाइन परियोजना पर जल्द हस्ताक्षर नहीं किए, तो उसे वित्तीय रूप से बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। व्हाइट हाउस में एक प्रेस इंटरैक्शन के दौरान यह तल्ख बयान तब आया जब एक पत्रकार ने ट्रंप को बताया कि दक्षिण कोरिया ने अभी तक इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी नहीं दी है।
ट्रंप का बदलता रुख और खुली धमकी
शुरुआत में ट्रंप का लहजा अपेक्षाकृत शांत था। उन्होंने कहा कि अगर दक्षिण कोरिया इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं होना चाहता, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं — वे बस उससे 'ज़्यादा कीमत वसूल करेंगे।' लेकिन जब पत्रकार ने स्पष्ट किया कि सोल अभी भी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, तो ट्रंप का रुख एकाएक कठोर हो गया।
ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, 'उन्हें बता दो कि अगर उन्होंने जल्द साइन नहीं किया, तो मैं इसे दोगुना कर दूंगा।' हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस 'कीमत' को दोगुना करने की बात कर रहे हैं — और न ही दक्षिण कोरिया को फैसला लेने के लिए कोई समयसीमा निर्धारित की।
अलास्का LNG परियोजना क्या है
अलास्का LNG परियोजना के तहत अलास्का के नॉर्थ स्लोप क्षेत्र से प्राकृतिक गैस को एक लंबी पाइपलाइन के ज़रिए राज्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित LNG प्रसंस्करण सुविधा तक पहुँचाने की योजना है। वहाँ इस गैस को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) में परिवर्तित कर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात किया जाएगा।
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं — विशेष रूप से दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य आयातित ऊर्जा पर निर्भर देशों — को इस परियोजना के संभावित प्रमुख खरीदारों के रूप में देखा जाता रहा है। यह ऐसे समय में है जब एशिया में ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है।
राजनयिक पृष्ठभूमि और संभावित असर
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की यह शैली नई नहीं है — वे व्यापार और ऊर्जा सौदों में सहयोगी देशों पर भी दबाव डालने के लिए टैरिफ या आर्थिक नतीजों की धमकी का इस्तेमाल करते रहे हैं। दक्षिण कोरिया अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य और व्यापारिक सहयोगी है, और दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापार असंतुलन पर तनाव रहा है।
ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका अपने LNG निर्यात को बढ़ाने की कोशिश में है और एशियाई देशों को दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों के लिए राज़ी करना उसकी ऊर्जा कूटनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह दबाव रणनीति अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार वार्ता को जटिल बना सकती है।
दक्षिण कोरिया का पक्ष
सोल का कहना है कि वह अभी भी इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और उसने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह स्थिति आने वाले हफ्तों में अमेरिका-दक्षिण कोरिया कूटनीतिक संवाद का केंद्र बन सकती है। ट्रंप की 'कीमत दोगुनी' की धमकी का व्यावहारिक स्वरूप क्या होगा — टैरिफ, रक्षा खर्च की शर्तें, या कोई अन्य आर्थिक उपाय — यह अभी अस्पष्ट है। ऊर्जा बाज़ार विशेषज्ञ इस घटनाक्रम पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं।