क्या जन्म नहीं, बल्कि चरित्र करता है किसी व्यक्ति को परिभाषित? उपराष्ट्रपति ने हरिजन सेवक संघ की प्रशंसा की

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क्या जन्म नहीं, बल्कि चरित्र करता है किसी व्यक्ति को परिभाषित? उपराष्ट्रपति ने हरिजन सेवक संघ की प्रशंसा की

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गांधी आश्रम में हरिजन सेवक संघ का दौरा किया, जहां उन्होंने महादेव देसाई लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। उन्होंने जन्म और चरित्र के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि चरित्र ही किसी व्यक्ति की पहचान करता है।

Key Takeaways

  • जन्म किसी व्यक्ति को परिभाषित नहीं करता।
  • चरित्र व्यक्ति की असली पहचान है।
  • ज्ञान सामाजिक बदलाव का एक महत्वपूर्ण साधन है।
  • हरिजन सेवक संघ सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का प्रयास करता है।
  • सामाजिक सेवा एक नैतिक जिम्मेदारी है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली के ऐतिहासिक गांधी आश्रम का दौरा किया। उन्होंने यहाँ महादेव देसाई लाइब्रेरी के विस्तार का उद्घाटन किया। इसी अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जन्म यह निर्धारित नहीं करता कि कोई व्यक्ति अच्छा है या बुरा। यह चरित्र है जो किसी व्यक्ति को परिभाषित करता है।

उपराष्ट्रपति ने आश्रम के अंदर स्थित कस्तूरबा संग्रहालय का भी दौरा किया, जहाँ महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी 1930 और 1940 के दशकों में दिल्ली यात्रा के दौरान रुके थे। इस यात्रा को बहुत भावुक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आश्रम में घूमना, जिसमें कस्तूरबा बा की ओर से इस्तेमाल किया गया साधारण घर और रसोई भी शामिल है, भारत के नेताओं की सादगी, त्याग और पक्के इरादे से जी गई सादी ज़िंदगी की एक मजबूत याद दिलाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महादेव देसाई लाइब्रेरी का उद्घाटन केवल एक भौतिक स्थान का विस्तार नहीं है, बल्कि यह इस विश्वास की पुष्टि है कि ज्ञान सामाजिक बदलाव का सबसे टिकाऊ साधन है।

महात्मा गांधी के व्यक्तिगत बदलाव पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने याद किया कि महात्मा गांधी का पश्चिमी कपड़े छोड़ने का फैसला भारतीय किसानों की गरीबी को देखने के बाद हुआ, जिसमें मदुरै रेलवे स्टेशन पर हुई घटना भी शामिल है। यहाँ महात्मा गांधी ने सिर्फ लंगोटी या धोती पहनने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, "यह बदलाव महात्मा गांधी की आम लोगों से जुड़ने और उनके उत्थान के लिए काम करने की आजीवन प्रतिबद्धता का प्रतीक था।"

उन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी के समर्थन का भी उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने भारत की कपास को मैनचेस्टर में प्रोसेस करके भारतीयों को वापस बेचे जाने का विरोध किया और इसके बजाय स्वदेशी का समर्थन किया।

इसी दौरान, उपराष्ट्रपति ने हरिजन सेवक संघ को महात्मा गांधी द्वारा लगाए गए एक बीज के रूप में बताया। उन्होंने कहा, "इसके काम ने शिक्षा, जागरूकता और सेवा के माध्यम से छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करके देश को स्थायी फल दिए हैं। जन्म यह तय नहीं करता कि कोई व्यक्ति अच्छा है या बुरा। यह चरित्र है जो किसी व्यक्ति को परिभाषित करता है।"

भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के जीवन को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरिजन सेवक संघ ने उनकी शिक्षा में सहायता करने और उनके जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीपी राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि संघ भविष्य में भी ऐसे कई और बेहतरीन लोगों को तैयार करता रहेगा। उन्होंने कहा कि समाज की सच्ची सेवा से चरित्र और विवेक वाले व्यक्ति बनते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि समाज उन्हें बनाने में क्या भूमिका निभाता है, लेकिन हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह समाज को कुछ वापस दे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सेवा करना एक नैतिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण का एक रास्ता भी।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्र के लिए गुजरात के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने राष्ट्र की आजादी के लिए महात्मा गांधी, राष्ट्रीय एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल और देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

Point of View

NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

उपराष्ट्रपति ने कौन सी लाइब्रेरी का उद्घाटन किया?
महादेव देसाई लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया।
उपराष्ट्रपति ने चरित्र के महत्व पर क्यों जोर दिया?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जन्म नहीं, चरित्र ही किसी व्यक्ति को परिभाषित करता है।
हरिजन सेवक संघ का उद्देश्य क्या है?
यह संघ शिक्षा, जागरूकता और सेवा के माध्यम से सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का कार्य करता है।
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