क्या उत्तराखंड ऋषियों की भूमि है? : सीएम पुष्कर सिंह धामी
सारांश
Key Takeaways
- उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान का संरक्षण आवश्यक है।
- अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
- सभी जिलाधिकारियों को परिवार रजिस्टर रखने का निर्देश दिया गया।
देहरादून, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड समस्त विश्व में आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह ऋषियों की भूमि है और इसका एक अद्वितीय मूल स्वरूप है, जिसने इसे एक आध्यात्मिक पहचान प्रदान की है। हम इसकी पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड की मौलिक पहचान को कमजोर करने के लिए विभिन्न तरह के उपाय कर रहे हैं, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे। कई स्थानों पर अतिक्रमण कर अवैध संरचनाएं बनाई गई हैं, जिन्हें हटाने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। अतिक्रमण के माध्यम से यहां की मूल संस्कृति पर हमला किया जा रहा है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। राज्य में अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी है। अब तक हमने राज्य की कई भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी जिलाधिकारियों को परिवार रजिस्टर रखने का निर्देश दिया गया है। इसके माध्यम से हम यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि केवल पात्र परिवारों को ही सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। कोई घुसपैठिया इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकेगा। इस दिशा में सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को मिले।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हम राज्य की जनसांख्यिकी को बिगड़ने नहीं देना चाहते हैं। हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक उत्कृष्ट प्रदेश देना चाहते हैं। यह हमारा संकल्प है और इस दिशा में हम कार्य कर रहे हैं। हम राज्य में राशन कार्ड से लेकर वोटर आईडी कार्ड तक का सत्यापन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में लोगों से उनकी संपूर्ण जानकारी ली जा रही है। यदि कहीं पर फर्जीवाड़ा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "शुरुआत से ही यह तय था कि डोभ क्षेत्र में स्थित नर्सिंग कॉलेज का नाम अंकिता भंडारी के नाम पर रखा जाएगा और इसके लिए सरकारी आदेश जारी कर दिया गया है।"