क्या आरबीआई पॉलिसी, ऑटो सेल्स और आर्थिक आंकड़ों से निर्धारित होगा बाजार का रुख?
सारांश
Key Takeaways
- आरबीआई की मौद्रिक नीति का प्रभाव बाजार पर महत्वपूर्ण होगा।
- ऑटो सेल्स के आंकड़े 1 दिसंबर से आने शुरू होंगे।
- भारतीय जीडीपी की विकास दर 8.2 प्रतिशत रही।
- बाजार में फार्मा और पीएसयू बैंक ने तेजी दिखाई।
- अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का पहला चरण इस साल के अंत तक पूरा हो सकता है।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता अत्यधिक महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस अवधि में आरबीआई की मौद्रिक नीति और ऑटो सेल्स के मासिक आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही, बाजार भारतीय जीडीपी के आंकड़ों पर भी अपनी प्रतिक्रिया देगा।
ऑटो सेल्स के आंकड़े एक दिसंबर से उपलब्ध होने लगेंगे, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति कमेटी (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर के बीच प्रस्तावित है।
इसके अलावा, शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जीडीपी की विकास दर सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत रही, जो कि लगभग 7 प्रतिशत के अनुमान से बहुत अधिक है। इस स्थिति में, सोमवार को जीडीपी आंकड़ों पर बाजार की प्रतिक्रिया पर निवेशकों की नजरें होंगी।
24-28 नवंबर के कारोबारी हफ्ते में, निफ्टी 0.52 प्रतिशत या 134.80 अंक बढ़कर 26,202.95 पर और सेंसेक्स 0.56 प्रतिशत या 474.75 अंक बढ़कर 85,706.67 पर बंद हुआ।
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में व्यापक तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 766.95 अंक या 1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 61,043.25 पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 18 अंक की मामूली गिरावट के साथ 17,829.25 पर बंद हुआ।
इस अवधि में बाजार को बढ़ाने में फार्मा और पीएसयू बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। निफ्टी पीएसयू बैंक (1.62 प्रतिशत) और निफ्टी फार्मा (1.85 प्रतिशत) के साथ सकारात्मक बंद हुए।
साथ ही, निफ्टी आईटी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स एक प्रतिशत की वृद्धि के साथ बंद हुए।
वहीं दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी पीएसई और निफ्टी कंजप्शन लाल निशान में बंद हुए।
इसके अतिरिक्त, भविष्य में अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर नई जानकारी भी बाजार को दिशा देने का कार्य करेगी।
हाल ही में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण इस साल के अंत तक पूरा हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों ने आपसी अधिकांश मुद्दों को सुलझा लिया है।