बाजार की पाठशाला: क्या है ईटीएफ और इसमें निवेश कैसे करें?
सारांश
Key Takeaways
- ईटीएफ एक सुरक्षित निवेश विकल्प है।
- इसे शेयर बाजार में आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है।
- कम खर्च अनुपात और उच्च तरलता का लाभ उठाएं।
- म्यूचुअल फंड की तुलना में ईटीएफ अधिक फायदेमंद है।
- इसे विभिन्न शेयरों और परिसंपत्तियों में निवेश किया जा सकता है।
मुंबई, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज के शेयर बाजार में निवेश के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण विकल्प है ईटीएफ, जिसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड कहते हैं। ईटीएफ एक ऐसा निवेश साधन है जिसे शेयर बाजार में स्टॉक के समान खरीदा और बेचा जा सकता है, लेकिन इसमें निवेश म्यूचुअल फंड की तरह कई शेयरों, वस्तुओं या परिसंपत्तियों में एक साथ होता है।
ईटीएफ किसी विशेष इंडेक्स, वस्तु या प्रॉपर्टी के मूल्य को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, निफ्टी ईटीएफ, निफ्टी इंडेक्स के शेयरों में निवेश करता है। इसी प्रकार, गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ सोने और चांदी की कीमत पर आधारित होता है। निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के माध्यम से शेयर बाजार में ट्रेडिंग के समय ईटीएफ खरीद और बेच सकते हैं।
ईटीएफ में निवेश करने के लिए निवेशक के पास डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट होना अनिवार्य है। शेयर बाजार खुलने पर ईटीएफ को उसी तरह खरीदा जा सकता है जैसे किसी कंपनी का शेयर। इसकी कीमत दिनभर बदलती रहती है, जो संबंधित सूचकांक या वस्तु के मूल्य पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इक्विटी यानी शेयर में निवेश करने पर पैसा किसी एक कंपनी में लगता है, जबकि ईटीएफ में एक साथ कई कंपनियों या परिसंपत्तियों में निवेश होता है। इक्विटी में जोखिम अधिक होता है क्योंकि कंपनी के खराब प्रदर्शन से नुकसान हो सकता है, जबकि ईटीएफ में जोखिम तुलनात्मक रूप से कम होता है क्योंकि निवेश बंटा हुआ होता है।
यदि हम म्यूचुअल फंड की तुलना करें, तो म्यूचुअल फंड में निवेश दिन के अंत की नेट एसेट वैल्यू पर होता है, जबकि ईटीएफ को दिन में कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। म्यूचुअल फंड का प्रबंधन सक्रिय रूप से किया जाता है, जबकि अधिकतर ईटीएफ निष्क्रिय होते हैं और इंडेक्स को फॉलो करते हैं। इसके अलावा, ईटीएफ में खर्च अनुपात भी कम होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईटीएफ का सबसे बड़ा लाभ इसकी पारदर्शिता और कम लागत है। निवेशक को पता होता है कि उसका पैसा कहां लगाया गया है। कम खर्च अनुपात के कारण लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना होती है। इसके अलावा, ईटीएफ में तरलता अधिक होती है और इन्हें कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है।