पीएम धन-धान्य कृषि योजना का पहला साल पूरा: 100 जिलों का औसत स्कोर 18.85 से बढ़कर 46.89 हुआ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) 11 अक्टूबर 2026 को अपना पहला वर्ष पूरा कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को जारी फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना के तहत 100 आकांक्षी कृषि जिलों में लक्षित हस्तक्षेपों के ज़रिए कृषि उत्पादकता, सिंचाई, ऋण सुलभता और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया जा रहा है। यह योजना देश के उन जिलों पर केंद्रित है जहाँ कृषि क्षमता अभी तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाई है।
योजना की पृष्ठभूमि और संरचना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएमडीडीकेवाई को 16 जुलाई 2025 को छह वर्षों की अवधि के लिए मंज़ूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को इस योजना की औपचारिक शुरुआत की। यह योजना 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं, राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के समन्वय से लागू की जा रही है, जिससे स्थानीय कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप कदम उठाना संभव हो रहा है।
निगरानी और प्रगति का ढाँचा
योजना का डैशबोर्ड अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुआ। नवंबर 2025 से मासिक आउटपुट इंडिकेटर के आधार पर सभी 100 जिलों की रैंकिंग शुरू की गई, जिससे प्रगति की वास्तविक समय निगरानी संभव हुई। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, सभी 100 जिलों ने जिला कृषि योजनाएँ (डीएपी) तैयार कर ली हैं और उनका क्रियान्वयन जारी है। राज्य, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा समितियाँ भी गठित की गई हैं।
फैक्टशीट में कहा गया है कि सभी 100 जिलों ने अगस्त 2026 तक के आउटपुट इंडिकेटर के आँकड़े जमा कर दिए हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के परिणाम संकेतक भी प्रस्तुत कर दिए हैं।
मुख्य उपलब्धि: स्कोर में 28 अंकों का सुधार
फैक्टशीट के अनुसार, छह उद्देश्यों के आधार पर 100 जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 के 18.85 से बढ़कर अगस्त 2026 में 46.89 हो गया — यानी 28.04 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। यह आँकड़ा योजना के समर्थकों के लिए प्रगति का प्रमुख संकेतक है, हालाँकि स्कोर पद्धति की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
सीएसआर और एफपीओ की भागीदारी
सार्वजनिक उद्यम विभाग ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के तहत डीडीकेवाई जिलों को अपनाने की व्यवस्था की है। दिसंबर 2025 में आयोजित पीएम-डीडीकेवाई एफपीओ संगम में 15 राज्यों और 33 जिलों के 72 से अधिक किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने भाग लिया।
इस संगम में प्राकृतिक खेती, तिलहन, मधुमक्खी पालन, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, संस्थागत वित्त और डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर अनुभव साझा किए गए। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब देशभर में किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य पर पुनः ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
आगे की राह
केंद्रीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से जिलों की प्रगति की समीक्षा कर मार्गदर्शन दे रहे हैं। योजना के दूसरे वर्ष में उत्पादकता संकेतकों को परिणाम संकेतकों से जोड़ने पर ज़ोर रहेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कोर में हुआ सुधार किसानों की वास्तविक आय और उपज में किस हद तक परिलक्षित होता है।