अमिताभ बच्चन ने KBC में बताया ट्रोलिंग का तोड़: 'कम लिखा तो फॉलोअर्स बढ़ते गए'
सारांश
मुख्य बातें
महानायक अमिताभ बच्चन ने 12 अक्टूबर 2026 को क्विज़ रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के मंच पर सोशल मीडिया ट्रोलिंग से निपटने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि नकारात्मक टिप्पणियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर खुलकर लिखने से रोका, और विडंबना यह है कि कम लिखने के बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या लगातार बढ़ती गई।
कंटेस्टेंट के सवाल से शुरू हुई बात
शो में आए प्रतिभागी विनम्र ने बिग बी से सीधा सवाल किया कि वे सोशल मीडिया पर आलोचना को किस तरह संभालते हैं। विनम्र ने कहा, 'मैं तो आपसे यह सवाल पूछना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर आप आलोचना को हैंडल कैसे करते हैं? जैसे मेरी ऐज ग्रुप के लोगों को क्रिटिसिज्म बिल्कुल हैंडल करना नहीं आता और नहीं हो पाता।' इस पर अभिनेता ने स्वीकार किया कि जेन-ज़ी पीढ़ी के लिए नकारात्मकता को पचाना अक्सर कठिन होता है।
पहले खुलकर लिखते थे, फिर बदला नज़रिया
अमिताभ बच्चन ने बताया कि शुरुआत में वे सोशल मीडिया को दिल की बात बेबाकी से कहने का माध्यम मानते थे। उनके अनुसार, 'पहले हमने सोचा कि सोशल मीडिया पर हम बिना सोचे समझे दिल की बात बोल सकते हैं।' लेकिन जब कमेंट्स पढ़ने शुरू हुए, तो उन्होंने उस तरह लिखना बंद कर दिया।
कमेंट्स में मिली अपमानजनक शब्दावली
अभिनेता ने उदाहरण देते हुए बताया कि उनके पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोग 'अपने आप को क्या समझता है रे तू बुढ़ऊ... ऐसे क्यों बोल रहा है?' जैसी भाषा का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा, 'ऐसी-ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे देखकर बहुत अजीब लगता है।' इसी के बाद उन्होंने खुलकर लिखना छोड़ दिया।
कम लिखा, फॉलोअर्स बढ़े — बिग बी का हल्का-फुल्का खुलासा
बच्चन ने अपनी बात एक चुटीले अंदाज में समाप्त करते हुए कहा, 'और भाईसाहब एक बात बताएं आपको? जब से कम लिखना कर दिया है, हमारे फॉलोअर्स बढ़ते चले जा रहे हैं।' यह सुनकर स्टूडियो में मौजूद सभी लोग खिलखिला उठे। गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन ने 2008 में अपना निजी ब्लॉग शुरू किया था और तब से वे कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया ट्रोलिंग एक व्यापक सामाजिक चर्चा का विषय बन चुकी है और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसके दुष्प्रभावों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। बिग बी का यह अनुभव युवा पीढ़ी के लिए एक व्यावहारिक सबक के रूप में देखा जा रहा है।