क्या 'अन्नपूर्णा स्टूडियोज' के संस्थापक अक्किनेनी नागेश्वर राव ने तमिल-तेलुगू के साथ हिंदी सिनेमा में भी किया अभिनय का प्रदर्शन?
सारांश
Key Takeaways
- अक्किनेनी नागेश्वर राव ने 255 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
- उन्होंने अन्नपूर्णा स्टूडियोज की स्थापना की।
- उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले।
- उनका परिवार आज भी दक्षिण सिनेमा में सक्रिय है।
- उनकी विरासत दर्शकों के दिलों में जीवित है।
मुंबई, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज का दक्षिण भारतीय सिनेमा पूरे भारत और वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस क्षेत्र की नींव रखने वाले अद्वितीय अभिनेताओं में से एक अक्किनेनी नागेश्वर राव (एएनआर) हैं। उन्होंने न केवल तेलुगू और तमिल सिनेमा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि हिंदी और कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा।
अन्नपूर्णा स्टूडियोज के संस्थापक के रूप में, एएनआर ने तेलुगू सिनेमा को एक नई दिशा दी। उनका जन्म 20 सितंबर 1923 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के रामपुरम गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। आर्थिक समस्याओं के कारण उनकी शिक्षा केवल तीसरी कक्षा तक सीमित रही, लेकिन अभिनय के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि वे महज 10 वर्ष की आयु में रंगमंच पर सक्रिय हो गए। उस समय महिलाओं के अभिनय पर रोक होने के कारण, उन्होंने स्त्री भूमिकाएं भी निभाईं।
एएनआर ने 1941 में तेलुगू फिल्म 'धर्मपत्नी' से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की और 73 वर्षों में 255 से अधिक फिल्मों में काम किया। 1950 के दशक में उनका तमिल सिनेमा में प्रवेश हुआ, जहाँ 1954 में उनकी पहली लीड भूमिका वाली फिल्म 'विप्र नारायण' बनी। इस फिल्म में उन्होंने तमिल संत विप्र नारायण की भूमिका निभाई।
उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अभिनय किया और अपनी बहुआयामी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीता। 1956 में 'तेनाली रामकृष्ण' (तमिल संस्करण) में तेनाली रामकृष्ण के किरदार ने उन्हें काफी सराहना दिलाई। इस फिल्म को ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट फॉर बेस्ट फीचर से सम्मानित किया गया। उनकी अभिनय शैली में संवाद, नृत्य और भाव-भंगिमाओं का अद्भुत संतुलन दर्शकों को पसंद आया।
एएनआर केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक सफल निर्माता भी थे। उन्होंने तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री को मद्रास (चेन्नई) से हैदराबाद स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1976 में उन्होंने 'अन्नपूर्णा स्टूडियोज' की स्थापना की, जो कि उनकी पत्नी अन्नपूर्णा के नाम पर रखा गया था। यह स्टूडियो 22 एकड़ में फैला हुआ है और तेलुगू सिनेमा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण रहा। पहले यह अन्नपूर्णा पिक्चर्स (1951 में स्थापित) के रूप में शुरू हुआ, जिसकी पहली फिल्म 'डोंगा रामुडु' थी। स्टूडियो ने कई तमिल-तेलुगू फिल्मों का निर्माण और सह-निर्माण किया, साथ ही तकनीकी सुविधाओं को मजबूत किया।
उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में 'लैला मजनू', 'देवदासु', 'अनारकली', 'मंगल्या बालम', 'प्रेमा नगर', 'मेघसंदेसम' शामिल हैं। सिनेमा जगत में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें 1968 में पद्मश्री, 1988 में पद्म भूषण, 1990 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और 2011 में पद्म विभूषण शामिल हैं।
उन्हें 1992 में तमिलनाडु स्टेट फिल्म ऑनरेरी अवॉर्ड अरिग्नार अन्ना अवॉर्ड भी मिला। उनका परिवार आज भी दक्षिण सिनेमा में सक्रिय है। उनके बेटे नागार्जुन और पोते नागा चैतन्य, अखिल अक्किनेनी अभिनेता हैं। 2014 में रिलीज हुई 'मनम' में तीन पीढ़ियां साथ नजर आईं। 22 जनवरी 2014 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।