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अश्मिता बख्शी बोलीं — 'शिव शक्ति' में माता सती का किरदार मेरा पहला पौराणिक प्रोजेक्ट, खुद को धन्य मानती हूं

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अश्मिता बख्शी बोलीं — 'शिव शक्ति' में माता सती का किरदार मेरा पहला पौराणिक प्रोजेक्ट, खुद को धन्य मानती हूं

सारांश

अभिनेत्री अश्मिता बख्शी पौराणिक थिएटर नाटक 'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' में माता सती के रूप में मंच पर उतरी हैं। उनका कहना है कि यह उनका पहला पौराणिक प्रोजेक्ट है और इस किरदार को पाकर वे खुद को धन्य मानती हैं।

मुख्य बातें

अश्मिता बख्शी पौराणिक थिएटर नाटक 'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' में माता सती की मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
यह नाटक दर्शकों को पौराणिक कथाओं के तीन अलग अलग युगों से रूबरू कराएगा।
अश्मिता ने कहा — यह उनका पहला पौराणिक प्रोजेक्ट है और इस किरदार को मिलना उनके लिए एक दिव्य अनुभव है।
नाटक का संदेश — किसी भी रिश्ते में सच्चाई और स्वयं के प्रति ईमानदारी सबसे ज़रूरी है।
नाटक में शक्ति, सती और पार्वती तीनों रूपों को एक ही प्रस्तुति में दर्शाया गया है।

अभिनेत्री अश्मिता बख्शी पौराणिक थिएटर नाटक 'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' में माता सती की केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। मुंबई में प्रस्तुत होने वाले इस नाटक को लेकर अश्मिता ने कहा कि यह उनका पहला पौराणिक प्रोजेक्ट है और इसे मिला मौका उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं।

नाटक की खासियत और तीन युगों की यात्रा

अश्मिता ने बताया कि 'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' दर्शकों को पौराणिक कथाओं के तीन अलग अलग युगों से रूबरू कराएगा। उन्होंने कहा, "आप सिर्फ एक कहानी नहीं देखेंगे। आप पौराणिक कथाओं के तीन अलग अलग युग देखेंगे।" नाटक का संगीत, कोरियोग्राफी, लेखन और निर्देशन — हर पहलू को अभिनेत्री ने 'शानदार' बताया।

गौरतलब है कि यह नाटक पौराणिक आख्यान को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है, जिसमें शक्ति, सती और पार्वती — तीनों रूपों को एक ही प्रस्तुति में समेटा गया है।

माता सती का किरदार — एक दिव्य अनुभव

माता सती की भूमिका मिलने पर अश्मिता ने कहा, "मुझे लगा कि मैं धन्य हो गई, क्योंकि शक्ति, सती और पार्वती सभी माताएं हैं।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह उनका पहला पौराणिक अनुभव है, इसलिए वह इस भूमिका को लेकर एक सीखने की यात्रा पर हैं। अभिनेत्री के अनुसार नाटक की लेखन और निर्देशन शैली इतनी सहज है कि दर्शकों को पता भी नहीं चलेगा कि वे कब तीन युगों की कथा से गुज़र गए।

शिव शक्ति की प्रेम कहानी से आज के रिश्तों को संदेश

जब अश्मिता से पूछा गया कि शिव और शक्ति की प्रेम कहानी में कोई ऐसा संदेश है जो आज के रिश्तों पर भी लागू होता हो, तो उन्होंने कहा, "रिश्ता चाहे सदियों पुराना हो या आज की पीढ़ी का, अपने पार्टनर के प्रति सच्चा रहना बहुत जरूरी है।"

उन्होंने आगे जोड़ा, "हमारे शिवजी ने कभी भी खुद को माता पार्वती के माता पिता के हिसाब से नहीं बदला। वो दोनों एक दूसरे के लिए ही बने थे, और उन्होंने एक दूसरे को वैसे ही स्वीकार किया जैसे वो थे।" अश्मिता के अनुसार आज की पीढ़ी के लिए यही सबसे बड़ा संदेश है — खुद के प्रति सच्चे रहो।

अश्मिता बख्शी की थिएटर यात्रा

यह नाटक अश्मिता बख्शी के करियर में एक नया अध्याय जोड़ता है। पौराणिक थिएटर में यह उनकी पहली प्रस्तुति है और उनके लिए यह केवल एक अभिनय का अवसर नहीं, बल्कि एक समृद्ध व्यक्तिगत अनुभव भी है। रंगमंच पर पौराणिक कथाओं को नए नज़रिए से प्रस्तुत करने की यह कोशिश भारतीय दर्शकों के बीच किस तरह की प्रतिक्रिया पैदा करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' जैसे प्रोजेक्ट यह संकेत देते हैं कि OTT के दबदबे के बावजूद लाइव रंगमंच पर पौराणिक कथाओं की माँग बनी हुई है। अश्मिता बख्शी का यह पहला पौराणिक अनुभव दर्शाता है कि युवा अभिनेत्रियाँ इस विधा को गंभीरता से ले रही हैं — जो एक सकारात्मक संकेत है। हालाँकि, नाटक की व्यापक सामाजिक पहुँच और 'तीन युगों' के प्रयोग की सफलता का मूल्यांकन मंचन के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया से ही होगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'शिव शक्ति एक दिव्य प्रसंग कथा' नाटक क्या है?
यह एक पौराणिक थिएटर नाटक है जो शिव और शक्ति की दिव्य प्रेम कथा को तीन अलग अलग युगों — शक्ति, सती और पार्वती — के माध्यम से प्रस्तुत करता है। नाटक में संगीत, कोरियोग्राफी और नए दृष्टिकोण से लिखी पटकथा को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
अश्मिता बख्शी इस नाटक में कौन सा किरदार निभा रही हैं?
अश्मिता बख्शी इस नाटक में माता सती की मुख्य भूमिका में हैं। यह उनका पहला पौराणिक प्रोजेक्ट है और उन्होंने इसे अपने करियर का एक विशेष और समृद्ध अनुभव बताया है।
अश्मिता बख्शी ने माता सती का किरदार मिलने पर क्या कहा?
अश्मिता ने कहा कि जब उन्हें यह किरदार मिला, तो उन्हें लगा कि वे धन्य हो गई हैं क्योंकि शक्ति, सती और पार्वती — सभी माताएं हैं। उन्होंने इसे अपना पहला पौराणिक अनुभव बताते हुए कहा कि यह उनके लिए बहुत अलग और समृद्ध यात्रा है।
नाटक आज के रिश्तों को क्या संदेश देता है?
अश्मिता के अनुसार नाटक का मुख्य संदेश यह है कि किसी भी रिश्ते में सच्चाई सबसे ज़रूरी है। उन्होंने शिव पार्वती के उदाहरण से बताया कि सच्चा प्रेम वह है जहाँ दोनों एक दूसरे को बिना बदले, जैसे हैं वैसे ही स्वीकार करें।
इस नाटक में तीन युग कौन से हैं?
नाटक में पौराणिक कथाओं के तीन युगों को दर्शाया गया है — शक्ति, सती और पार्वती के रूप में माँ के तीन स्वरूपों की कथा। अश्मिता के अनुसार नाटक का निर्देशन इस तरह किया गया है कि दर्शकों को इन तीनों युगों के बीच का संक्रमण बेहद सहज लगेगा।
राष्ट्र प्रेस
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