क्या सिनेमा जगत ने पहली बार सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड दिया?

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क्या सिनेमा जगत ने पहली बार सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड दिया?

सारांश

20 जनवरी को वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है, जो तकनीकी कलाकारों के योगदान को उजागर करता है। जानें कैसे यह दिन सिनेमा जगत में एक नई पहचान बना गया।

Key Takeaways

  • वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के तकनीकी योगदान को मान्यता देता है।
  • सिनेमेटोग्राफर की भूमिका सिनेमा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सिनेमा के इतिहास में 20 जनवरी का दिन एक विशेष महत्व रखता है। यह दिन दर्शाता है कि पर्दे पर अभिनय करने वाले अभिनेताओं के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों का भी योगदान कितना महत्वपूर्ण है।

इसी दिन सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें 2008 के लिए दिया गया था, और वह इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले सिनेमेटोग्राफर बने।

भारत फिल्म निर्माण के मामले में विश्व में पहले स्थान पर है। हर चलचित्र के पीछे निर्देशक, अभिनेता और तकनीकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान होता है, जिसमें सिनेमेटोग्राफर की भूमिका सबसे प्रमुख होती है। वे ही फिल्म की रोशनी, दिशा, फ्रेमिंग और दृश्यों की खूबसूरती का निर्धारण करते हैं।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत 1969 में हुई थी, और यह भारतीय सिनेमा में विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। इतने वर्षों में पहली बार किसी सिनेमेटोग्राफर को यह उच्चतम सम्मान प्राप्त हुआ जब वी.के. मूर्ति को चुना गया। उनका नाम पुरानी पीढ़ी के सिने प्रेमियों के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। उन्होंने गुरु दत्त के साथ लंबे समय तक काम किया और 1950 के दशक में उनकी क्लासिक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों को अपने अद्भुत छायांकन कला से अमर बना दिया। उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में प्यासा, कागज के फूल, चौदहवीं का चांद और साहिब बीवी और गुलाम शामिल हैं।

इन फिल्मों में उनकी रोशनी और कैमरा तकनीक आज भी सिनेमा के छात्रों के लिए अनुकरणीय है। हालांकि, वी.के. मूर्ति को यह सम्मान पाने में काफी लंबा इंतज़ार करना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत और योगदान को अंततः वह पहचान मिली, जिसके वे हकदार थे। यह घटना भारतीय सिनेमा में तकनीकी कलाकारों के महत्व को उजागर करती है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा में तकनीकी विशेषज्ञों का योगदान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करना इस बात का प्रमाण है कि सिनेमा सिर्फ एक्टिंग का नाम नहीं है, बल्कि यह एक टीम वर्क है।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

वी.के. मूर्ति कौन हैं?
वी.के. मूर्ति एक प्रसिद्ध भारतीय सिनेमेटोग्राफर हैं, जिन्होंने कई क्लासिक फिल्मों में अपनी छायांकन कला से योगदान दिया है।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार क्या है?
यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में विशेष योगदान के लिए दिया जाता है।
वी.के. मूर्ति को यह पुरस्कार कब मिला?
उन्हें यह पुरस्कार 20 जनवरी 2010 को मिला था।
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