क्या बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच सोने-चांदी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना लिया?
सारांश
Key Takeaways
- सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का कारण वैश्विक तनाव हैं।
- कीमती धातुओं का उपयोग औद्योगिक मांग में भी बढ़ रहा है।
- ब्याज दरों में संभावित कटौती से कीमतों को सहारा मिल सकता है।
- विश्लेषकों का मानना है कि वृद्धि लंबे समय तक बनी रह सकती है।
- निवेशकों को मुनाफावसूली पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बढ़ते वैश्विक तनावों के चलते सोने और चांदी ने मंगलवार के कारोबारी सत्र में एक और नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।
एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की कीमतें पिछले दिन के रिकॉर्ड को पार करते हुए नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। सोना फरवरी वायदा 1,47,996 रुपए प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी मार्च वायदा 3,19,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
सोमवार के व्यापार में, फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड पर था, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर चांदी की कीमत 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, वहीं सोने की कीमत 4,708.10 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इससे पूर्व में, सोने ने 4,689.39 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड छुआ था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड से संबंधित बयानों और टैरिफ की धमकियों ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
लेख लिखे जाने तक, एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.55 प्रतिशत यानी 2,255 रुपए की वृद्धि के साथ 1,47,894 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 7,279 रुपए यानी 2.35 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,17,554 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी।
यह वृद्धि ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे पर विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद आई।
कीमती धातुओं में यह वृद्धि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध कर रहे देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद हुई।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। इसके अलावा, उन्होंने यूरोपीय देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी दी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वे यूरोपीय संघ के 'एंटी-कोएरशन' तंत्र को लागू करने की मांग करेंगे। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संयम बरतने की अपील की। वहीं, डेनमार्क द्वारा ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के फैसले ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
बाजार इस बात पर भी ध्यान दे रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के खिलाफ कोई कदम उठाने की योजना बना रहा है। इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है।
इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदें भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दे रही हैं। साल 2025 में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से इन धातुओं को मजबूत समर्थन मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमती धातुओं में आई यह तेजी सुरक्षित निवेश के साथ-साथ चांदी की औद्योगिक मांग को भी दर्शाती है। चांदी का उपयोग सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है।
विश्लेषकों ने कहा कि तकनीकी रूप से कॉमेक्स पर चांदी का रुख अभी मजबूती से बना हुआ है। 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकता है।
ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है और चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक आ सकती है, उसके बाद फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बहुत तेज बढ़त के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि आपूर्ति की चिंताओं और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण लंबे समय में सोने और चांदी का रुख मजबूत बना रहेगा।