फराह खान ने माथे पर टीका लगाने से किया इनकार, वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की जानी-मानी फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना कर रही हैं। कथित तौर पर एक इवेंट में फराह खान ने होटल स्टाफ द्वारा माथे पर टीका लगाए जाने से इनकार कर दिया — इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैला और देखते ही देखते ट्रोलर्स ने उन्हें निशाना बना लिया। यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो किस कार्यक्रम या स्थान का है।
वीडियो में क्या दिखा
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक होटल की लॉबी में स्टाफ सदस्य आरती की थाली लेकर फराह खान का पारंपरिक स्वागत कर रहा है। जब स्टाफ की एक महिला सदस्य उनके माथे पर टीका लगाने के लिए आगे बढ़ती है, तो फराह मना कर देती हैं और इसके बजाय अपनी कलाई पर टीका लगवाना स्वीकार करती हैं। वीडियो की उत्पत्ति या संदर्भ अभी तक सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक यूज़र ने लिखा, 'फराह खान को बुरा लग जाता है जब एक महिला स्वागत के तौर पर उन्हें टीका लगाती है। नेल पॉलिश लगाना जो इस्लाम में हराम है, वो पहन रही हैं, लेकिन टीका लगाने से नाराज हो रही हैं क्योंकि नेल पॉलिश स्टाइल है और टीका हिंदू परंपरा है।'
एक अन्य यूज़र ने लिखा, 'फराह खान ने पहले फूलों की बारिश से मना किया, फिर माथे पर कुमकुम लगाने से साफ मना कर दिया। जब उन्हें पता है कि वहाँ ऐसे प्रोसीजर होंगे, तो वे ऐसी जगहों पर जाते ही क्यों हैं?' एक तीसरे यूज़र ने सवाल किया, 'वह पब्लिक में सेक्युलर दिखती हैं, अगर ऐसा है तो सेक्युलर फराह खान ने माथे पर टीका लगाने से मना क्यों किया?'
फराह खान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
अब तक फराह खान की तरफ से इस वायरल वीडियो या ट्रोलिंग पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे किस विशेष कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी बॉलीवुड हस्ती के सार्वजनिक आचरण को लेकर सोशल मीडिया पर इस तरह की बहस छिड़ी हो।
फराह खान के बारे में
फराह खान भारतीय सिनेमा की अग्रणी कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने बॉलीवुड से साउथ सिनेमा तक में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 2004 में फिल्म 'मैं हूँ ना' से बतौर निर्देशक डेब्यू किया, इसके बाद 2007 में 'ओम शांति ओम', 2010 में 'तीस मार खान' और 2014 में 'हैप्पी न्यू ईयर' का निर्देशन किया। आलोचकों का कहना है कि उनकी सार्वजनिक उपस्थिति अक्सर बहस का विषय बनती रही है।
आगे क्या
सोशल मीडिया पर यह बहस जारी है और यूज़र्स अलग-अलग नज़रियों से इस घटना पर अपनी राय रख रहे हैं। फराह खान यदि इस मुद्दे पर कोई स्पष्टीकरण देती हैं, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।