20 अक्टूबर 2026
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टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी: संजय शर्मा बोले — फिल्म जगत को दोबारा दहशत के दौर में नहीं जाने देंगे

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टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी: संजय शर्मा बोले — फिल्म जगत को दोबारा दहशत के दौर में नहीं जाने देंगे

सारांश

टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी के बाद फिल्म 'सहिया' के निर्माता संजय शर्मा ने बेबाक आवाज़ उठाई है — मुंबई का फिल्म जगत 1990 के दौर की दहशत दोबारा नहीं सहेगा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस से खुफिया तंत्र मजबूत करने और पूरे अपराधी नेटवर्क तक जाँच पहुँचाने की माँग की है।

मुख्य बातें

फिल्म 'सहिया' के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा ने 20 अक्टूबर 2026 को टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी की कड़ी निंदा की।
महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस से कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धमकियों पर तत्काल कार्रवाई की माँग।
शर्मा ने कहा — हमले को अंजाम देने वालों के साथ पूरे अपराधी नेटवर्क तक जाँच पहुँचनी चाहिए।
खुफिया तंत्र को मजबूत करने और घटना से पहले सक्रिय होने वाली सुरक्षा व्यवस्था की माँग।
फिल्म संगठनों से एकजुट होकर सरकार और पुलिस के साथ समन्वय करने की अपील।

फिल्म 'सहिया' के निर्माता एवं निर्देशक संजय शर्मा ने 20 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की घटनाएं बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

क्या है पूरा मामला

संजय शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी कलाकार पर हमला पूरे फिल्म जगत के भीतर असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। उनके अनुसार, कलाकार अपनी मेहनत और प्रतिभा से लोगों का मनोरंजन करते हैं, देश को पहचान देते हैं और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़े उद्योग को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में उन्हें डर और धमकियों के साये में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

शर्मा ने याद दिलाया कि मुंबई का फिल्म उद्योग पहले भी धमकियों, जबरन वसूली और हमलों का दौर देख चुका है। उनका कहना है कि उस दौर की दहशत को दोबारा लौटने देना बेहद खतरनाक होगा।

कलाकारों और फिल्मकर्मियों पर असर

शर्मा ने कहा कि किसी अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, गायक या अन्य फिल्मकर्मी को यह सोचकर घर से नहीं निकलना चाहिए कि उसकी जान को खतरा हो सकता है। उनके अनुसार, फिल्म जगत में भय का माहौल बनने का असर कलाकारों के परिवारों, शूटिंग पर मौजूद तकनीकी कर्मचारियों और पूरे कामकाज पर पड़ता है।

यह ऐसे समय में आया है जब मनोरंजन उद्योग पहले से ही ओटीटी प्रतिस्पर्धा और बदलते दर्शक व्यवहार के बीच नई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में सुरक्षा का संकट उद्योग की उत्पादकता को गहरी चोट पहुँचा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर माँग

शर्मा ने खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था केवल घटना हो जाने के बाद सक्रिय होने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — खतरे की समय रहते पहचान, धमकी देने वालों की निगरानी और संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान आवश्यक है।

उन्होंने यह भी माँग की कि जिन कलाकारों या फिल्मकर्मियों को धमकियाँ मिल रही हैं, उनके खतरे का तत्काल आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। शिकायत दर्ज कराने और पुलिस से मदद लेने की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें पीड़ित बिना झिझक अपनी बात रख सके।

अपराधी नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील

शर्मा ने कहा कि जो गैंगस्टर फिल्म उद्योग के लोगों को धमकाते हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, हमले को अंजाम देने वालों के साथ-साथ साजिश रचने, हथियार उपलब्ध कराने, आर्थिक मदद देने और धमकियाँ पहुँचाने वाले पूरे नेटवर्क तक जाँच पहुँचनी चाहिए।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मुंबई के फिल्म उद्योग ने संगठित अपराध से उपजी धमकियों का सामना किया हो। 1990 के दशक में भी कई बड़े नामों को इसी तरह के खतरों से जूझना पड़ा था।

फिल्म संगठनों से एकजुटता की अपील

शर्मा ने फिल्म संगठनों से भी कलाकारों और कर्मचारियों की सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार तथा पुलिस के साथ समन्वय करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'सुरक्षित माहौल हर कलाकार और फिल्मकर्मी का अधिकार है।'

शर्मा ने टाइगर श्रॉफ और उनके परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए इस घटना की निष्पक्ष और गहन जाँच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग दोहराई। उनका कहना है — दहशत को सामान्य स्थिति मान लेना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के पास इस तरह की 'प्रिवेंटिव इंटेलिजेंस' की व्यवस्था वास्तव में है, या यह फिर एक बार 'घटना के बाद की प्रतिक्रिया' तक सिमट जाएगी। फिल्म उद्योग पर गैंगस्टर दबाव नया नहीं है — 1990 के दशक में यही पैटर्न था, और तब भी मजबूत बयान आए थे, लेकिन संरचनात्मक बदलाव धीमा रहा। जब तक फिल्मकर्मियों के लिए एक समर्पित शिकायत और सुरक्षा तंत्र नहीं बनता, ये माँगें सुर्खियों तक ही सीमित रहने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना क्या है?
20 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना हुई, जिसकी फिल्म उद्योग ने व्यापक निंदा की है। इस घटना के बाद मुंबई में कलाकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
संजय शर्मा ने महाराष्ट्र सरकार से क्या माँग की है?
फिल्म 'सहिया' के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस से कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, खुफिया तंत्र मजबूत करने और धमकी देने वाले पूरे अपराधी नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था घटना होने के बाद नहीं, बल्कि पहले से सक्रिय होनी चाहिए।
क्या मुंबई का फिल्म उद्योग पहले भी ऐसे खतरों से गुजरा है?
हाँ, मुंबई का फिल्म उद्योग 1990 के दशक में भी धमकियों, जबरन वसूली और गैंगस्टर दबाव का दौर देख चुका है। संजय शर्मा ने उसी दौर का हवाला देते हुए चेताया है कि उस दहशत को दोबारा सामान्य नहीं बनने देना चाहिए।
फिल्म उद्योग में भय के माहौल का क्या असर पड़ता है?
शर्मा के अनुसार, भय का माहौल केवल कलाकारों तक सीमित नहीं रहता — इसका असर उनके परिवारों, शूटिंग पर मौजूद तकनीकी कर्मचारियों और पूरे उद्योग के कामकाज पर पड़ता है। लाखों लोगों की आजीविका इस उद्योग से जुड़ी है।
कलाकारों को धमकी मिलने पर क्या करना चाहिए?
संजय शर्मा ने माँग की है कि धमकी पाने वाले कलाकारों और फिल्मकर्मियों के लिए एक ऐसी शिकायत व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें वे बिना झिझक पुलिस से मदद ले सकें और उन्हें कार्रवाई की समय पर जानकारी मिले। इसके साथ ही उनके खतरे का तत्काल आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
राष्ट्र प्रेस
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