जुहू में टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग: एआईसीडब्ल्यूए ने देवेंद्र फडणवीस से की 5 सख्त मांगें
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी की घटना ने फिल्म उद्योग में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्ल्यूए) ने 18 अक्टूबर 2026 को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की विफलता पर सवाल उठाए और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की। संगठन ने सीधे मुख्यमंत्री व गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को पाँच सूत्री मांगपत्र सौंपा है।
लगातार निशाने पर बॉलीवुड हस्तियाँ
एआईसीडब्ल्यूए ने रेखांकित किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले बांद्रा में अभिनेता सलमान खान के आवास के बाहर गोलियाँ चलाई गई थीं। अभिनेता सैफ अली खान को उनके बांद्रा स्थित घर में घुसकर चाकू मारा गया था। फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर भी फायरिंग हुई थी। इसके अलावा कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर भी कई बार हमले हो चुके हैं।
संगठन ने कहा, 'फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को एक के बाद एक निशाना बनाया जा रहा है, जिससे जानबूझकर डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। मकसद साफ है कि गैंगस्टर बॉलीवुड हस्तियों को डरा-धमकाकर उनसे जबरन वसूली करना चाहते हैं।'
एआईसीडब्ल्यूए का सरकार से सीधा सवाल
एसोसिएशन ने सवाल उठाया, 'आज टाइगर श्रॉफ हैं। अगला कौन होगा? जब मुंबई के बीचों-बीच कोई सेलिब्रिटी सुरक्षित नहीं है, तो एक आम मुंबईकर खुद को कैसे सुरक्षित महसूस कर सकता है?'
संगठन ने आरोप लगाया कि पिछली घटनाओं में गैंगस्टरों ने खुलेआम जिम्मेदारी ली थी, फिर भी उनका नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई पुलिस पर पहले से ही संगठित अपराध से निपटने की क्षमता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
पाँच सूत्री मांगें
एआईसीडब्ल्यूए ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से निम्नलिखित पाँच माँगें रखी हैं:
पहली — गैंगस्टरों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई। दूसरी — गोली चलाने वालों की शीघ्र गिरफ्तारी। तीसरी — एक्सटॉर्शन नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना। चौथी — फिल्म हस्तियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराना। पाँचवीं — विफलता के लिए ज़िम्मेदारी तय कर कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा बहाल करना।
1990 के दशक के अंडरवर्ल्ड की याद
एआईसीडब्ल्यूए अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने कहा, 'मुंबई को 1990 के दशक के अंडरवर्ल्ड वाले दौर में वापस नहीं जाने दिया जाएगा। बॉलीवुड डर के साये में काम नहीं करेगा।'
गौरतलब है कि मुंबई में सेलिब्रिटीज़ को निशाना बनाने की इन घटनाओं की शृंखला ने सुरक्षा एजेंसियों और राज्य सरकार दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है। आलोचकों का कहना है कि केवल बयानबाज़ी से काम नहीं चलेगा — ठोस कानूनी और पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्या इस बार वास्तव में कोई बदलाव आता है।