गजराज राव ने इंस्टाग्राम पर 'सोशल मीडिया पिस्सुओं' को लेकर उठाया सवाल, माँगा समाधान
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता गजराज राव ने 12 सितंबर 2026 को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के ज़रिए सोशल मीडिया पर अनचाहे और परेशान करने वाले यूज़र्स को लेकर अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर की। उन्होंने अपने फॉलोअर्स से पूछा कि ऐसे लोगों से निपटने का आखिर क्या तरीका होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
राव ने बताया कि उनकी आदत है कि जब भी उन्हें कोई पोस्ट अच्छी लगती है — चाहे वह किसी अभिनेता की परफॉर्मेंस हो, किसी लेखक या निर्देशक का काम, कोई खूबसूरत जगह, कोई रेस्टोरेंट, या कोई पसंदीदा उत्पाद — तो वे उस पोस्ट के नीचे सराहना में कमेंट करते हैं। उनके अनुसार इससे उन्हें तसल्ली और खुशी मिलती है।
लेकिन परेशानी तब होती है जब कुछ लोग उनके उस कमेंट के नीचे अपनी अलग ही 'भड़ास' टांग देते हैं, जिसका मूल पोस्ट से कोई संबंध नहीं होता।
गजराज राव के शब्दों में
अपनी पोस्ट में राव ने लिखा, 'आपको कोई पोस्ट अच्छी लगती है, आप उस पोस्ट के नीचे कमेंट करते हैं। उसे स्वीकार करने के लिए, उसकी सराहना करने के लिए। किसी अभिनेता की परफॉर्मेंस अच्छी लगी, किसी लेखक या निर्देशक का काम अच्छा लगा, किसी का जन्मदिन है, कोई खूबसूरत जगह के बारे में बता रहा है... मैं कमेंट कर देता हूँ। मुझे तसल्ली मिलती है। मुझे अच्छा लगता है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कोई नमूना मेरे कमेंट के नीचे अपनी भड़ास टांग जाता है। जैसे, 'ये फोन बेकार है', 'इस कार की आफ्टर सेल्स सर्विस बहुत खराब है', 'मुझे इस रेस्टोरेंट का खाना पसंद नहीं', 'अक्षय कुमार से मेरी बात करवा दो', 'कार्तिक के लिए मेरे पास एक स्क्रिप्ट है, उनसे कहिए मेरे डीएम का जवाब दें।''
'सोशल मीडिया पिस्सू' — राव की मज़ेदार तुलना
ऐसे यूज़र्स को गजराज राव ने एक अनोखा नाम दिया — 'सोशल मीडिया पिस्सू'। उन्होंने लिखा, 'जैसे खून के पिस्सू होते हैं, वैसे ही ये सोशल मीडिया पिस्सू होते हैं। ये किसी के भी पीछे लग जाते हैं। अरे, अपनी बात अलग से पोस्ट करो न।'
यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटीज़ के साथ अनुचित व्यवहार और कमेंट सेक्शन में की जाने वाली अनचाही टिप्पणियाँ एक बड़ी चर्चा का विषय बनती जा रही हैं। गौरतलब है कि कई अन्य कलाकार भी पहले इस तरह की परेशानी ज़ाहिर कर चुके हैं।
फॉलोअर्स से माँगा समाधान
पोस्ट के अंत में राव ने एक सवाल दाग दिया — 'ऐसे लोगों का क्या करना चाहिए? क्या मार्क ने इनका कोई इलाज नहीं ढूँढा? किसी के पास कोई समाधान है?' यहाँ 'मार्क' से उनका इशारा मेटा के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग की ओर था।
उनकी इस पोस्ट पर फॉलोअर्स और प्रशंसकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं — कुछ ने इसे अपना अनुभव बताया, तो कुछ ने मज़ेदार सुझाव दिए। राव की यह पोस्ट डिजिटल शिष्टाचार और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर एक व्यापक बहस की ओर इशारा करती है, जो आने वाले समय में और गहरी होने की संभावना है।